आटोमोबाइल, टेक्सटाइल समेत कई सेक्टर में भीषण मंदी की सूचनाओं के बाद अब खानपान इंडस्ट्री भी इसकी चपेट में आ गई है। इसका असर कानपुर तक पहुंच गया है। देश की प्रमुख बिस्कुट निर्माता कंपनी पारले-जी की कानपुर यूनिट में काम कर रहे दो हजार से अधिक कर्मचारियों की नौकरी खतरे में है।
कंपनी अगले दो महीने में इनकी छंटनी की तैयारी कर रही है। हालात न सुधरे तो यह संख्या हर दो महीने में बढ़ती जाएगी। पारले-जी बिस्कुट की ग्रामीण क्षेत्र में अधिक खपत है। बीते एक साल से कंपनी ग्राहकों की गिरती क्रय क्षमता और 18 फीसदी जीएसटी की मार की शिकार है।
उधर, बाजार में क्रय क्षमता कम होने की वजह से उत्पादन लगातार गिरता जा रहा है। टैक्स की मार ने कंपनी का मुनाफा कम कर दिया है। पारले-जी बिस्कुट की देश भर में जितनी खपत होती है, उसका करीब 10 फीसदी उत्पादन कानपुर में होता है।
यहां प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 30,000 कर्मचारी कंपनी से रोजगार पाते हैं, लेकिन अगले एक से दो महीने में करीब दो हजार कर्मचारियों की नौकरी जा सकती है। दरअसल वर्ष 2017-18 की तुलना में 2018-19 में कानपुर स्थित यूनिट में करीब 15 फीसदी उत्पादन कम हुआ है।
यह गिरावट कंपनी की लगभग सभी इकाइयों में है। इस वजह से कंपनी सभी यूनिटों से 10 से 15 हजार कर्मचारियों की छंटनी करने जा रही है। बिस्कुट की खपत में ऐसे ही गिरावट आती रही तो आने वाले समय में और कर्मचारियों को निकालना पड़ सकता है।
सरकार ने नहीं मानी टैक्स कम करने की गुजारिश
कानपुर में पारले-जी उत्पादन इकाई के फ्रेंचाइजी होल्डर व उत्तर प्रदेश बिस्कुट निर्माता एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन खन्ना बताते हैं कि जीएसटी लागू होने से पहले बिस्कुट पर 12 प्रतिशत टैक्स लगता था। अब सरकार 18 फीसदी वसूल रही है।
100 रुपये किलो से कम में बिकने वाले बिस्कुट पर टैक्स कम करने की गुजारिश सरकार ने नहीं मानी। उधर, बाजार में 30 फीसदी तक बिक्री कम हुई है। मंदी के हालात देखकर नहीं लगता कि स्थिति में कुछ बदलाव आने वाला है। इस वजह से छंटनी करके कंपनी खर्चों को नियंत्रित कर रही है।