कानपुर। जिस सीवेज के पानी को कभी बेकार मानकर नदियों में बहा दिया जाता था वही अब बिजली उत्पादन में उपयोगी साबित हो रहा है। कानपुर के बिनगवां स्थित 40 एमएलडी टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट (टीटीपी) में अत्याधुनिक तकनीक से सीवेज के पानी का शोधन कर उसे पनकी थर्मल पावर प्लांट तक पहुंचाया जा रहा है। यहां इसका उपयोग कूलिंग टावरों और अन्य औद्योगिक प्रक्रियाओं में किया जा रहा है। इससे ताजे पानी की खपत कम हुई है और सिंचाई योग्य जल को भी बचाया जा रहा है।
शनिवार को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने बिनगवां स्थित संयंत्र का निरीक्षण कर परियोजना की प्रगति और संचालन व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि 249.92 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह परियोजना अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग और जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। बिनगवां में स्थापित 210 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में सीवेज का प्राथमिक और द्वितीयक शोधन किया जाता है। इसके बाद पानी को टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट में भेजा जाता है। यहां रिवर्स ऑस्मोसिस (आरओ) और अल्ट्रा फिल्ट्रेशन (यूएफ) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों से पानी को उच्च गुणवत्ता का बनाया जाता है। शोधन के बाद प्रतिदिन 40 एमएलडी पानी 18 किलोमीटर लंबी पाइप से पनकी थर्मल पावर प्लांट तक पहुंचाया जाता है। जिलाधिकारी ने बताया कि टैरिफ नीति-2016 के तहत एसटीपी से 50 किलोमीटर के दायरे में स्थित थर्मल पावर प्लांटों में शोधित सीवेज जल के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह परियोजना अपशिष्ट जल प्रबंधन, औद्योगिक जल उपयोग और जल संरक्षण का बेहतर उदाहरण है। भविष्य में इसे प्रदेश के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है।