फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP: कानपुर में तेजी से बढ़ रही पेटेंट-ट्रेडमार्क पंजीकरण की गति, बीते दो वर्षों में 200 फीसदी से अधिक की वृद्धि

Wed, 18 Mar 2026 06:28 AM IST
Himanshu Awasthi अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: कानपुर में स्टार्टअप और तकनीक को सुरक्षित करने के लिए पेटेंट और ट्रेडमार्क पंजीकरण में भारी उछाल आया है। वर्ष 2025 में पेटेंट पंजीकरण 200% बढ़कर 615 तक पहुंच गया, जो शहर में बढ़ते नवाचार को दर्शाता है।
विज्ञापन
नवदीप श्रीधर - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

  • केस एक: शहर के सतेंद्र श्रीवास्तव ने हिंदी भाषा में सुधार और लेखन में सहायता के लिए एआई आधारित प्लेटफार्म व्याकरणी को तैयार किया है। इसका उन्होंने ट्रेडमार्क हासिल कर लिया है और पेटेंट के लिए आवेदन किया है। यह छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय से इन्क्यूबेटेड एक स्टार्टअप है। ये हिंदी भाषा को सही, सुगढ़, सुगम और प्रभावी रूप में लिखने में सहायता प्रदान करता है।
  • केस दो: एन कोष एग्री-टेक क्षेत्र का स्टार्टअप है जिसकी स्थापना शहर के आशुतोष तिवारी ने की है। यह किसानों को खेती से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराता है। इसका भी ट्रेडमार्क लिया गया है। एन कोष छह राज्यों में 50,000 से अधिक किसानों को अपनी सेवाएं दे रहा है। 11 क्षेत्रीय भाषाओं में किसानों को फसल संबंधी सलाह, कृषि विशेषज्ञों से परामर्श, कमोडिटी बिडिंग और फार्म गेट समाधान जैसी सुविधाएं मिलती हैं।
  • केस तीन: फ्लोटा एक टेक्नोलॉजी स्टार्टअप है। इसका भी ट्रेडमार्क मिल चुका है। इसकी स्थापना शहर के भुवन भाटिया ने की है। यह स्टार्टअप एक स्मार्ट सेंट्रलाइज्ड वायरलेस वाटर सिस्टम है। यह एक ही प्लेटफॉर्म से कई पंप, वाॅल्व, टैंक, रिजर्वायर, वाटर जेट, मोटर और अन्य जल उपकरणों को नियंत्रित और रियल-टाइम में मॉनिटर करने की सुविधा देता है। यह तकनीक विश्वविद्यालयों, टाउनशिप, कॉलोनियों, स्कूल कैंपस, होटलों, रेलवे, एयरपोर्ट, आरओ प्लांट और औद्योगिक संस्थानों में जल प्रबंधन को अधिक कुशल और स्मार्ट बनाती है।
विज्ञापन

कानपुर में शहरी अपनी नई-नई तकनीक, स्टार्टअप को कारोबारी और कानूनी रूप से सुरक्षित कर रहे हैं। तकनीक का पेटेंट, डिजाइन या ट्रेडमार्क का तेजी से पंजीकरण करा रहे हैं। भारतीय पेटेंट कार्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक, शहर में अब तक कुल 5605 पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क पंजीकरण हो चुके हैं। 2025 में कुल 615 पेटेंट, 190 डिजाइन और 4800 ट्रेडमार्क पंजीकृत हुए हैं। पेटेंट पंजीकरण में बीते दो वर्षों में 200 फीसदी से अधिक की वृद्धि हुई है।
2025 में 615 पेटेंट फाइल हुए, जबकि 2024 में यह संख्या 560 थी। 2023 में केवल 200 पेटेंट दर्ज किए गए थे। वर्ष 2025 में 190 डिजाइन पंजीकृत हुए, 2024 में 115 डिजाइनों का पंजीकरण हुआ था। 2023 में यह आंकड़ा 50 था। यह चार गुना से अधिक की वृद्धि को दर्शाता है। ये आंकड़े नवाचार और रचनात्मकता के बढ़ते रुझान को दर्शाते हैं।  ट्रेडमार्क पंजीकरण की संख्या सबसे अधिक रही है। 2025 में कुल 4800 ट्रेडमार्क पंजीकृत किए गए। यह संख्या 2024 के 4200 और 2023 में 3800 से ज्यादा ट्रेडमार्क पंजीकरण हुए थे।

पिछले तीन वर्षों में मजबूत वृद्धि दिखी है
बौद्धिक संपदा अधिकार विशेषज्ञ नवदीप श्रीधर ने बताया कि ट्रेडमार्क पंजीकरण ने भी पिछले तीन वर्षों में मजबूत वृद्धि दिखी है। यह ब्रांड पहचान और व्यावसायिक सुरक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है।  यह निरंतर वृद्धि बाजार में नए उत्पादों और सेवाओं के आगमन का संकेत देती है। उन्होंने बताया कि कानपुर समेत देश में बौद्धिक संपदा (आईपी) आवेदनों में पिछले पांच वर्षों में तेज वृद्धि दर्ज की गई है, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 7,49,946 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।
विज्ञापन

कॉपीराइट आवेदनों की संख्या 24,451 से बढ़कर 44,095 हो गई
उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2020-21 में कुल 5,28,471 बौद्धिक संपदा आवेदन दाखिल किए गए थे। वित्त वर्ष 2024-25 तक ये बढ़कर 7,49,946 हो गए। पेटेंट आवेदन 2020-21 में 58,503 थे जो 2024-25 में 1,10,375 हो गए हैं। तीन वर्षों में डिजाइन आवेदन 14,241 से बढ़कर 43,005 तक पहुंच गए। ट्रेडमार्क आवेदनों की संख्या 4,31,213 से बढ़कर 5,52,190 हो गई है। कॉपीराइट आवेदनों की संख्या 24,451 से बढ़कर 44,095 हो गई है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें