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पहाड़ों में छिपे दुश्मनों के ठिकानों को तबाह करेगी कानपुर ओएफसी की सारंग तोप, इतनी है मारक क्षमता

Thu, 01 Aug 2019 02:14 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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सारंग तोप - फोटो : अमर उजाला
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आर्डनेंस फैक्ट्री कानपुर (ओएफसी)  में विकसित की गई शारंग तोप के बैरल की पहली खेप जबलपुर गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) के लिए रवाना की गई। निर्माणी के वरिष्ठ महाप्रबंधक मुकुल कुमार गर्ग, आर्डनेंस डेवलेपमेंट सेंटर (ओडीसी) के निदेशक रितुराज द्विवेदी ने हरी झंडी दिखाकर बैरल रवाना की। इस सप्ताह अलग-अलग दिनों में पांच और बैरलों को जीसीएफ भेजा जाएगा।
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जिन्हें वहां से सेना को भेजा जाएगा। इस साल 40-50 शारंग तोप सेना को दी जानी है। इससे पूर्व विधि-विधान से पूजा-पाठ की गई। नारियल फोड़ा गया और बैरल को माला पहनाई गई। निर्माणी के वरिष्ठ महाप्रबंधक ने बताया कि 2022 तक सेना को 300 तोप दी जानी हैं। इसमें से 150 तोप निर्माणी में बननी हैं। उन्होंने बताया कि शारंग पूरी तरह से स्वदेशी है।

सारंग तोप के सेना में जाने की खुशी मनाते फैक्ट्री कर्मी - फोटो : अमर उजाला
पिछले सप्ताह इटारसी प्रूफ रेंज में वृहद दबाव (हाई प्रेशर) पर इसका परीक्षण किया गया था। वहीं बताया कि मार्च 2018 में हुए कई परीक्षणों में इस तोप ने भारत फोर्ज और पुंज ल्यावड की तोपों को पछाड़कर ओपेन बिड में सेना से आर्डर हासिल किया था। तोप  निर्माण के लिए रक्षा मंत्रालय और आयुध निर्माणी बोर्ड के बीच 25 अक्तूबर को समझौता हुआ था। इस तोप की मारक क्षमता 38 किलोमीटर है।

तोप टारगेट को बेहद सटीकता के साथ ध्वस्त करती है। इसके अलावा तोप की निरंतरता (गोले दागने की क्षमता) जबरदस्त है। इस तोप से पहाड़ों में छिपे दुश्मनों को तबाह करने की विशेष क्षमता है। इस तोप को 70 डिग्री तक मूव किया जा सकता है। 2022 तक तीन सौ शारंग तोप का निर्माण कर सेना को दिया जाना है।  पहले चरण में 30 दूसरे चरण में 70 और अगले चरण में 100-100 तोप का निर्माण किया जाना है। इस दौरान अपर महाप्रबंधक एमके शर्मा, अनुपमा त्रिपाठी, आलोक कुमार, संयुक्त महाप्रबंधक सुभाष चंद्रा के अलावा विनय अवस्थी, विनोद तिवारी, राधेश्याम सिंह आदि मौजूद थे।


 
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भारतीय सेना में शामिल होने के लिए रवाना होती सारंग तोप - फोटो : अमर उजाला
एक्सपोर्ट इकोनॉमी की ओर निर्माणी
वरिष्ठ महाप्रबंधक ने बताया कि निर्माणी में बनने वाले उत्पादों का निर्यात करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। इसमें सरकार भी मदद कर रही है। निर्माणी में बनने वाले प्रकाश शेल को नार्थ ईस्ट राष्ट्र को निर्यात करने पर बातचीत अंतिम दौर में है। संभावना है कि निर्माणी को यहां से बड़ा ऑर्डर मिल सकेगा। इसके अलावा निर्माणी में बनने वाली छोटी तोपों के निर्यात पर काम शुरू किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि एक्सपोर्ट इकोनॉमी समय की मांग है। इस दिशा में तेजी से बढ़ा जाएगा।

तोप की खासियत
वजन 8 टन
लंबाई 11 मीटर
चौड़ाई 2.45 मीटर
ऊंचाई 2.55 मीटर
कैलिबर 155 मिलीमीटर
कैरिज स्प्लिट ट्रेल
मारक क्षमता 38 किलोमीटर तक
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