उरई में कालपी कोतवाली क्षेत्र के चौरासी गुंबद के पास हुए भीषण सड़क हादसे के बाद का मंजर दिल दहला देने वाला था। अयोध्या से लौट रही कार तेज रफ्तार ट्रक में पीछे से जा घुसी, जिससे कार सवार लोग बुरी तरह कार में फंस गए थे। हादसे के बाद कथा वाचक मनोज भोडेले ही बोल पा रहे थे। वह लगातार मदद की गुहार लगाते हुए कहते रहे- भाई साहब बचा लो, लेकिन हालात इतने गंभीर थे कि पुलिसकर्मी और अन्य लोग चाहकर भी उन्हें बचा नहीं सके।
हादसे के कुछ ही मिनटों में पीआरवी और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिसकर्मियों ने तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू किया। कार में फंसे घायलों को निकालने के लिए जवान लगातार प्रयास करते रहे। इस दौरान वे घायलों को हिलाकर-डुलाकर और आवाज देकर उनकी स्थिति जानने की कोशिश करते रहे, लेकिन कोई भी स्पष्ट रूप से जवाब देने की स्थिति में नहीं था। घायलों की हालत बेहद गंभीर थी। कई लोग लहूलुहान हालत में सिर्फ कराह रहे थे, जबकि कुछ पूरी तरह शांत हो चुके थे।
चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल था
घटनास्थल पर पहुंचे स्थानीय लोग भी यह भयावह दृश्य देखकर सहम गए और बेबस नजर आए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के बाद चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल था। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से किसी तरह घायलों को बाहर निकाला और तुरंत उरई मेडिकल कॉलेज पहुंचाया। इस भीषण हादसे में कुल आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि अन्य दो घायलों का इलाज जारी है। घटना से पूरे क्षेत्र में शोक और स्तब्धता का माहौल है।
Orai Road Accident
- फोटो : amar ujala
चाचा बचा लो…गुहार लगाता रहा शिवानंद, टूट गई जिंदगी की लड़ी
कालपी क्षेत्र में हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने कई परिवारों को उजाड़ दिया। हादसे के बाद कार में फंसा दीपक उर्फ शिवानंद जिंदगी और मौत के बीच जूझता रहा था। वह बार-बार अपने चाचा स्वामी प्रसाद को आवाज देता रहा, चाचा बचा लो. उसकी आवाज में दर्द, डर और जीने की आखिरी उम्मीद साफ झलक रही थी, लेकिन उसे यह नहीं पता था कि जिस चाचा को वह पुकार रहा है, वे पहले ही दम तोड़ चुके थे।
हर पल के साथ सांसें कमजोर होती जा रही थीं
कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी थी और अंदर फंसे लोग तड़प रहे थे। शिवानंद की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी, फिर भी वह मदद की गुहार लगाता रहा। मौके पर मौजूद लोग और पुलिस उसे निकालने की कोशिश में जुटे थे, लेकिन हर पल के साथ उसकी सांसें कमजोर होती जा रही थीं। आखिरकार बेबसी और दर्द के बीच जिंदगी की नड़ी टूट गई और उसकी आखिरी पुकार वहीं खामोश हो गई।
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लोगों के दिलों में जिंदा रहेगा दर्दनाक हादसा
यह मंजर देख मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। हादसे ने रिश्तों की उस पीड़ा को उजागर कर दिया, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। एक ही परिवार के कई लोगों की मौत ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया और यह दर्दनाक हादसा लंबे समय तक लोगों के दिलों में जिंदा रहेगा।
साढ़े 14 फीट की टवेरा कार 10 फीट में सिमटी
हादसे की टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। करीब साढ़े 14 फीट लंबी टवेरा कार सिमटकर महज 10 फीट रह गई। टक्कर के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और कई लोग कार के अंदर ही बुरी तरह फंस गए। घायलों को कड़ी मशक्कत के बाद बाहर क्रेन और गैस कटर से रेक्सयू कर बाहर निकाला गया।
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अयोध्या में सरयू तट पर की थी फोटोग्राफी
आचार्य मनोज भोडेले की अगुवाई में अयोध्या के दर्शनार्थियों ने रविवार को खंडित प्रतिमा को सरयू मे विसर्जित कर जमकर फोटोग्राफी की थी। इसमें सात लोग एक साथ मौजूद हैं। फोटो को रात में अंशुल तिवारी ने अपनी फेसबुक में डाला था।
मौके पर मिला है डंपर का टूटा बंपर, दो साल पहले खरीदी थी कार
भले ही हादसा होते किसी ने न देखा हो पर मौके पर मिले डंपर के बंपर के टुकड़े के कारण अंदाजा लगाया जा रहा है कि उसी से हादसा हुआ है। दुर्घटना का शिकार हुई टवेरा शशिकांत तिवारी चला रहा था। परिजनों ने बताया कि कार को छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से दो साल पहले खरीदा गया था। कागज अभी तक ट्रांसफर नहीं कराए थे।
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310 किमी सफर के बाद बुंदेलखंड में हादसा
कार सवार अयोध्या से लगभग 310 किलोमीटर की दूरी तय कर बुंदेलखंड क्षेत्र में पहुंचे थे और लगातार अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन जैसे ही कार ने बुंदेलखंड की सीमा में प्रवेश किया, कालपी क्षेत्र के चौरासी गुंबद के पास कार हादसे का शिकार हो गई। बताया जा रहा है कि उन्हें आगे ललितपुर जिले के महरौनी तक लगभग 225 किलोमीटर का सफर और तय करना था, लेकिन मंजिल से पहले ही यह दर्दनाक हादसा हो गया।
सफेद कार हो गई थी खून से लाल
सोमवार की सुबह 5:45 मिनट पर कालपी के चौरासी गुंबद के पास टवेरा कार का हादसा हुआ। तो जहां एक ओर नींद से जाग रहे थे। वहीं हाईवे पर कार कार सवार घायलों की चीखने की आवाजें आ रही थी। आंखें मलते हुए लोग जब कार के पास पहुंचे तो, कार में लहूलुहान लोग अपनी जिंदगी और मौत से संघर्ष कर रहे थे। क्षतिग्रस्त कार की हालत देख लोग मदद भी नहीं कर पा रहे थे। सफेद रंग की कार खून से लाल हो गई थी।
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हादसे की संभावित वजहें
- तेज रफ्तार– प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार चालक कार को करीब 120 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चला रहा था, जिससे वाहन पर नियंत्रण नहीं रह सका।
- नींद की झपकी– करीब 310 किलोमीटर लंबा सफर तय करने के दौरान चालक को झपकी आ जाने की आशंका जताई जा रही है, जिससे वाहन अचानक असंतुलित हो गया।
- थकान– लगातार लंबी दूरी तक ड्राइविंग करने से चालक अत्यधिक थक गया था, जिससे उसकी एकाग्रता और प्रतिक्रिया क्षमता प्रभावित हुई।