चार मई को वकील ने दे दी थी जानकारी
मुकदमे में 27 जुलाई 1987 में बाबूराम, समरथ सिंह व अमर को आजीवन कारावास की सजा हुई थी, जबकि रामलखन को बरी कर दिया था। बाद में तीनों ने हाईकोर्ट में अपील की तो जमानत मिली और तभी से वह जेल से बाहर थे। इस दौरान बाबूराम व समरथ सिंह व रामलखन की मौत हो गई। हत्या के मुकदमे में अमर सिंह, बाबूराम व समरथ सिंह को चार मई को हत्या का दोषी मानते हुए सजा सुनाई गई। चार मई को इसकी जानकारी अमर सिंह को वकील ने दे दी थी।
वृद्ध तनाव में थे, जांच की जा रही है
इससे परेशान होकर बुधवार की रात नलकूप की कोठी पर पहुंचे और फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस को पुत्र रविंद्र सिंह ने बताया कि वकील का फोन आने के बाद से ही पिता परेशान थे। वह बार-बार यही कर रहे थे कि वह अब इस अवस्था में जेल नहीं जाना चाहते हैं। परिजनों ने बताया कि उन्हें समझाया था और नलकूप पर जाकर आराम से सोने के लिए कहा था। वह यह कदम उठा लेंगे यह पता नहीं था। थाना प्रभारी वरुण प्रताप सिंह का कहना है कि वृद्ध तनाव में थे, इसी के चलते उन्होंने आत्महत्या की है। जांच की जा रही है।