केंद्र सरकार की मदरसा आधुनिकीकरण योजना का भले ही मदरसा संचालकों का एक तबका विरोध करे लेकिन हकीकत में मदरसों में दीनी तालीम (धार्मिक शिक्षा) हासिल कर रहे छात्र भी आधुनिक शिक्षा पाना चाहते हैं।
वे भी डॉक्टर, इंजीनियर और आईएएस, आईपीएस बनना चाहते हैं। मौजूदा समय में मदरसों में आधुनिक शिक्षा के नाम पर सिर्फ हिंदी, अंग्रेजी पढ़ाई जा रही है जो इन छात्रों के सपनों को पूरा करने में कारगर नहीं। मदरसा संचालकों में भी आधुनिक शिक्षा दिलाने या न दिलाने पर मतभेद हैं।
देवबंदी उलेमा का एक बड़ा धड़ा मदरसों में आधुनिक शिक्षा देने की सरकारी योजनाओं से असहमत है और वह उसे मदरसा शिक्षा पद्धति में दखल मानता है। जबकि बरेलवी उलेमा का एक बड़ा धड़ा मदरसों में दीनी शिक्षा के साथ आधुनिक शिक्षा दिलाने का पक्षधर है।
मुस्लिम बुद्धिजीवी भी चाहते हैं कि मदरसों से हाफिज, आलिम, फाजिल, मौलवी निकलें लेकिन साथ ही डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासनिक अधिकारी भी निकलें।
चमनगंज फहीमाबाद कालोनी स्थित मदरसा जिया-ए-मुस्तफा में कक्षा दो में पढ़ रहे बंगाल के छात्र मोहम्मद तहसीन रजा ने बताया कि वह आलिम बनेगा लेकिन डॉक्टर बनना चाहता है। कक्षा चार का छात्र मोहम्मद साहिल बाराबंकी का रहने वाला है। उसके पिता बाराबंकी में परचून की दुकान चलाते हैं। पैसे की कमी की वजह से वह मदरसे में पढ़ता है।
उसने बताया कि वह हाफिज, आलिम बनने के बाद इंजीनियर भी बनना चाहता है, ताकि उसकी गरीबी दूर हो सके। कक्षा पांच के मोहम्मद मुदस्सिर का एक भाई आलिमत की पढ़ाई कर रहा है। उसका कहना है कि वह डॉक्टर बनेगा और नमाज के वक्त मस्जिद में इमामत भी करेगा।
कक्षा दस के छात्र मोहम्मद नदीम ने बताया कि वह मदरसे की पढ़ाई के बाद अंग्रेजी का ट्यूशन पढ़ने जाता है। उसकी ख्वाहिश है कि उर्दू, अरबी के साथ अंग्रेजी भी फर्राटे से बोले।
योजना दी, तनख्वाह नहीं
केंद्र की मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत जिले के 112 मदरसों में 270 शिक्षक नियुक्त किए गए। मदरसों में आधुनिक शिक्षा के विषयों को पढ़ाने के लिए प्रत्येक मदरसे में तीन शिक्षक नियुक्त किए गए थे। इसमें एमए बीएड योग्यता के 197 शिक्षकों को हर महीने 12 हजार रुपये केंद्र सरकार और तीन हजार रुपये राज्य सरकार देती थी।
बीए बीएड योग्यता के 73 शिक्षकों को हर महीने केंद्र की ओर से छह हजार और प्रदेश की ओर से दो हजार रुपये मिलते थे। डेढ़ से दो साल तक वेतन रुके होने से कुछ शिक्षकों ने नौकरी छोड़ दी तो कुछ ने ढंग से पढ़ाया नहीं।
वेतन न मिलने से मदरसा प्रबंधन भी शिक्षकों पर दबाव नहीं बना पाते थे। जिले में 500 से अधिक मदरसे हैं। इनमें 112 मान्यता प्राप्त और 24 राज्य सरकार से अनुदानित हैं।