झींझक ब्लाक में समाजवादी पार्टी ने राजेंद्र सिंह
को अपना प्रत्याशी घोषित किया था।
राजेंद्र सिंह अपने पूर्व निर्धारित
कार्यक्रम के मुताबिक झींझक ब्लाक में सुबह 11 बजे नामांकन दाखिल करने
पहुंचे। उनके साथ लाठी डंडों और असलहों से लैस एक हजार से ज्यादा
कार्यकर्ता भी थे। तभी ब्लाक कार्यालय के अंदर एक न्यूज चैनल की ओबी वैन
आकर खड़ी हो गई तो सपाइयों ने बवाल शुरू कर दिया।
इस पर अधिकारियों ने ओबी
वैन को बाहर करवा दिया। इसके बाद सपाइयों को मनमानी करने का मौका मिल गया।
थोड़ी ही देर बाद हजारों सपा कार्यकर्ता हथियारों से लैस होकर झींझक की
गलियों में फैल गए।
सड़क पर आने-जाने वालों को भगाने लगे। किसी को ब्लाक की
ओर नहीं जाने दिया। दोपहर 12.30 बजे सपा उम्मीदवार राजेंद्र सिंह ने पर्चा
रिटर्निंग अधिकारी सच्चिदानंद यादव को सौंप दिया। इसके बाद सपाइयों ने हर
गली-चौराहे पर नाकेबंदी कर दी। दोपहर 1.30 बजे सपा के बागी बब्बन शर्मा
प्रत्याशी अपनी पत्नी रेनू शर्मा और प्रस्तावकों के साथ झींझक के भोलानगर
पहुंचे तो सपाइयों ने उन पर पथराव और फायरिंग कर दी। इससे भगदड़ मच गई।
बब्बन शर्मा, उनके प्रस्तावक समेत कई कार्यकर्ता घायल हो गए।
ब्लाक
कार्यालय में मौजूद सीडीओ राजकुमार श्रीवास्तव ने वायरलेस कर जिला मुख्यालय
से एक ट्रक पीएसी बुलवा ली। पीएसी अपनी सुरक्षा में रेनू शर्मा को नामांकन
दाखिल करवाने के लिए आगे बढ़ी तो सपाइयों ने पीएससी के सुरक्षा घेरे से
रेनू शर्मा को अगवाकर पास के मकान में बंधक बना लिया और जमकर हवाई फायरिंग
की।
तीन घंटे तक सैकड़ों गोलियां चलने के बाद भी मौके पर न तो पुलिस का कोई
बड़ा अधिकारी पहुंचा और न ही जिलाधिकारी आए। दोपहर ढाई बजे बंधक बनाई गईं
रेनू शर्मा को पुलिस ने शाम छह बजे जैसे-तैसे सपाइयों से मुक्त कराया। घायल
बब्बन शर्मा और अन्य को झींझक सीएचसी में भर्ती कराया गया।
उधर मलासा
में सपा ने अनूप सिंह की पत्नी आकांक्षा को प्रत्याशी बनाया है। बसपा की ओर
से संजय सचान की पत्नी प्रेमकांती मैदान में हैं। सुबह आकांक्षा का
नामांकन तो हो गया लेकिन अनूप सिंह व उनके समर्थक सुबह 10 बजे से ही मलासा
जाने के सभी रास्तों पर नाकेबंदी करे रहे। किसी को ब्लाक तक नहीं जाने दिया
गया।
बसपाइयों की पिटाई कर खदेड़ दिया गया। गोली चलाई गई। कई वाहन
क्षतिग्रस्त कर दिए गए। मीडियाकर्मियों से भी बदसलूकी की गई। इससे दोपहर तक
प्रेमकांती का नामांकन नहीं हो सका। खेतों के रास्ते छिपते-छिपाते वे
बमुश्किल नामांकन कराने पहुंची मगर पर्चा खारिज कर दिया गया।