सर्जिकल स्ट्राइक में इस्तेमाल होने वाले पैराशूट कॉम्बैट फ्री फाल (सीएफएफ) अब कानपुर की आयुध पैराशूट निर्माणी (ओपीएफ) में तैयार होने लगे हैं। कम्यूनिकेशन, ऑक्सीजन और नेविगेशन सिस्टम से लैस इस पैराशूट का ट्रायल 16 अगस्त से आगरा स्थित एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलेपमेंट इस्टेब्लिशमेंट (एडीआरडीई) में शुरू होगा।
ट्रायल में सफल होने पर इसका उत्पादन होने लगेगा। भारतीय सेना अभी इस तरह के पैराशूट अमेरिका से आयात कर रही है। हाई एल्टीड्यूड पेनिट्रेशन सिस्टम पर आधारित इस पैराशूट का सेना के जवान 100 बार से 500 बार तक इस्तेमाल कर सकेंगे। 30 हजार फुट की ऊंचाई से सेना के जवान इसे पहनकर कूद सकेंगे।
यह पैराशूट हेलमेट माउंटेड रेडियो ट्रांसमिशन सिस्टम से लैस है, जिसकी मदद से सर्जिकल स्ट्राइक पर जाने वाले जवानों का एक-दूसरे से बेहतर संपर्क हो सकेगा। इसके जरिए विषम परिस्थितयों में होने पर तत्काल अपने साथियों या यूनिट तक सूचनाएं भेजने में आसानी होगी।
हवा में 500 फुट की ऊंचाई पर ठहर सकते हैं जवान
18 किलोग्राम वजन वाले पैराशूट में ऑक्सीजन सिस्टम लगा है। सिस्टम का एक लीटर वाला ऑक्सीजन सिलिंडर 20 मिनट का बैकअप देता है। यह ग्लाइडिंग पैराशूट की तरह काम करेगा। इसकी मदद से हवा में 500 फुट की ऊंचाई पर जवान ठहर सकते हैं।
खास डिवाइस से ऊंचाई पर सांस लेने में नहीं आएगी दिक्कत
पैराशूट में खास तरह का आटोमैटिक ओपन डिवाइस लगा है। कोई जवान यदि बेहद ऊंचाई पर जाता है, उसे सांस लेने या कोई अन्य दिक्कत होती है या वह अचेत हो जाता है तो यह डिवाइस खुद-ब-खुद खुल जाएगी। इससे उसकी जान को खतरा नहीं रहेगा।
12 लाख का एक पैराशूट
99 फीसदी स्वदेशी उपकरणों से तैयार इस पैराशूट की कीमत करीब 12 लाख रुपये है। सेना द्वारा आयात किए जाने पर पैराशूट की कीमत 50 लाख रुपये से अधिक बैठती है।
बेहद महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट
सूत्रों के मुताबिक, सीएफएफ का प्रोजेक्ट बेहद महत्वाकांक्षी है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सीएफएफ पर काम शुरू होने के साथ ही सेना ने इसकी मॉनीटरिंग शुरू कर दी थी। इसमें होने वाले हर अपडेट की सेना बराबर जानकारी ले रही है।
8.5 टन वजनी सामान गिराया जा सकेगा
ओपीएफ में हैवी ड्रॉप पैराशूट, मैन कैरिंग पैराशूट और हाई एल्टीट्यूड पैराशूट का भी उत्पादन हो रहा है। ओपीएफ के पी सेवन पैराशूट से 8.5 टन वजनी सामान आसमान से गिराया जा सकेगा। इसका इस्तेमाल आईएल-76 एयरक्राफ्ट में किया जाता है।
तेजस के लिए ब्रेक पैराशूट का उत्पादन शुरू
निर्माणी ने स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस के लिए ब्रेक पैराशूट भी तैयार किया है। इसका बल्क में उत्पादन शुरू कर दिया गया है। इसकी मदद से तेजस को दुर्गम पहाड़ियों और छोटे रनवे पर भी आसानी से उतारा जा सकता है।
'इसे पूरी तरह से मेक इन इंडिया के तहत तैयार किया गया है। 16 अगस्त से आगरा में इसका परीक्षण शुरू होगा। इसके लिए 54 पैराशूट का सेट तैयार करके दिया गया है।' - जीसी राउत (महाप्रबंधक ओपीएफ)