शहर के नौ फुटकर दवा विक्रेताओं के पास ही टेमीफ्लू बेचने का लाइसेंस है। लेकिन तीन मेडिकल स्टोर के पास ही टेमीफ्लू की मेडिसिन उपलब्ध है। सभी मेडिकल स्टोर्स स्वाइनफ्लू की दवा टेमीफ्लू नहीं बेच सकते।
टेमीफ्लू (ओसेल्टामीविर कैप्सूल) शेड्यूल एक्स की श्रेणी में आता है। शेड्यूल एक्स की दवा बेचने के लिए ड्रग लाइसेंस के अलावा एक और लाइसेंस लेना पड़ता है। छह थोक विक्रेताओं के पास भी इसका लाइसेंस हैं।
ड्रग इंस्पेक्टर मनोज कुमार ने कहा कि शेड्यूल एक्स का लाइसेंस लेने वाले दवा विक्रेताओं से कहा गया है कि वह टेमीफ्लू की उपलब्धता बनाए रखें। स्वाइनफ्लू की पुष्टि के बाद टेमीफ्लू दवा दी जाती है।
सरकारी सप्लाई में यह दवा मालीक्यूल के नाम ओसेल्टामीविर पर मिलती है। दवा की दुकानों पर इसे टेमीफ्लू नाम से बेचा जाता है। इस दवा की बिक्री सिर्फ डॉक्टर के पर्चे पर ही होती है।
साथ ही डॉक्टर के पर्चे की फोटोकॉपी रखकर रिकॉर्ड भी मेंटेन करना पड़ता है। दवा कभी - कभार ही बिकने के कारण फुटकर दवा विक्रेता इसे रखना नहीं चाहते हैं।
एडीएम सिटी अविनाश सिंह ने बताया कि शक्ति मेडिकल, नवीन मेडिकल और पापुलर मेडिकल स्टोर्स पर टेमीफ्लू की दवा उपलब्ध है।
पॉश इलाके में स्वाइन फ्लू के लक्षण वाली महिला की मौत
स्वाइन फ्लू जैसे लक्षण वाली तिलकनगर निवासी ऊषा चंद्रा ने शुक्रवार देर शाम एक निजी अस्पताल में दम तोड़ दिया। ऊषा चंद्रा का थ्रोट कल्चर का सैंपल केजीएमयू लखनऊ भेजा गया था।
हालांकि रिपोर्ट निगेटिव आई लेकिन रिपोर्ट आने के दूसरे दिन उनकी मौत हो गई। पहले डॉक्टरों ने महिला को स्वाइन फ्लू पीड़ित बताया लेकिन रिपोर्ट आने के बाद उन्हें सीवियर निमोनिया से पीड़ित बताया।
स्वाइन फ्लू और सीवियर निमोनिया के लक्षण तकरीबन समान होने के कारण डॉक्टर भी कन्फ्यूज हो गए हैं। परिवार के लोगों का कहना है कि रिपोर्ट निगेटिव आने से स्वाइन फ्लू की शंका खत्म हो गई है। उन्होंने कहा कि ऊषा चंद्रा का अंतिम संस्कार कर दिया गया है।