देश में 500 व 1000 रुपए के नोट बंद किए जाने का बड़ा फैसला प्रधानमंत्री द्वारा अचानक नहीं लिया गया। इसके लिए छह महीने पहले ही योजना बननी शुरू हो गई थी।
मगर सरकार के इस फैसले की जानकारी केवल छह लोगों के पास थी। इनमें प्रिंसिपल सेक्रटरी नृपेंद्र मिश्रा, पूर्व और वर्तमान आरबीआई गवर्नर, वित्त सचिव अशोक लवासा, आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास और वित्त मंत्री अरुण जेटली। सूत्रों के मुताबिक, योजना को लागू करने की प्रक्रिया दो महीने पहले शुरू हुई।
फिलहाल सरकार के समक्ष एक बड़ी कठिनाई क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और चेक से पेमेंट करने वाले लोगों की होगी क्योंकि इनमें काफी तेजी आने वाली है।
वहीं माना जा रहा है कि देश में 400 से 500 करोड़ रुपए के जाली नोट हो सकते हैं। बाजार में चल रहे नोटों के मुकाबले, ये रकम बेहद छोटी है। योजना का मकसद ब्लैक मनी पर कार्रवाई है, लेकिन इसके तहत कितनी रकम छिपी हुई है, इस बात का अंदाजा लगाना मुश्किल है।