कोरोना काल में डेढ़ माह से न्यायिक कार्य ठप होने की वजह से पीड़ितों के इंसाफ का इंतजार और लंबा हो गया है। शहर की सेशन, लोअर और विशेष अदालतों में लंबित लगभग दो लाख मुकदमों की सुनवाई ठप है। हाईकोर्ट के निर्देश पर वर्चुअल माध्यम से सिर्फ जमानत, रिमांड या मजिस्ट्रेटी बयान आदि जरूरी कार्यवाही ही चल रही हैं।
लंबित मुकदमों में सामान्य तारीखें लग रही हैं। नए मुकदमे दाखिल न होने से पीड़ित परेशान हैं। इंसाफ की आस लगाए पीड़ितों का इंतजार बढ़ता ही जा रहा है। कोरोना के चलते पिछले साल भी लगभग छह माह तक मुकदमों की सुनवाई प्रभावित हुई थी। सही मायने में लगभग डेढ़ साल से न्यायिक कार्य सामान्य नहीं हो पाया है।
लंबित मुकदमों में सिर्फ तारीखें
शहर के चर्चित मामले हों या आम आदमी से संबंधित मुकदमे, सभी में सिर्फ सामान्य तारीखें ही लगाई जा रही हैं। न्यायिक कामकाज ठप होने से पीड़ित परेशान हैं, वहीं सुनवाई न होने से न्यायालयों में लंबित मुकदमों का बोझ भी बढ़ता जा रहा है।
वर्चुअल कामकाज की भी उठी मांग
लॉयर्स एसोसिएशन की ओर से हाईकोर्ट को भेजे ज्ञापन में वर्चुअल माध्यम से ज्यादा से ज्यादा न्यायिक कामकाज करने के निर्देश जारी करने की मांग की गई थी। कई अन्य अधिवक्ताओं ने भी व्यक्तिगत तौर पर हाईकोर्ट से ऐसी ही अपील की है, लेकिन अब तक कोई निर्देश जारी न होने से न्यायिक काम सिर्फ जमानत तक ही सिमट गया है।
वर्चुअल माध्यम से घट सकता बोझ
सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत एफआईआर दर्ज कराने के लिए दिए गए प्रार्थना पत्रों की सुनवाई, परिवाद में पीड़ित व गवाहों के बयान और फिर अभियुक्तों को तलब करने के लिए बहस, अभियुक्तों के खिलाफ कोर्ट में आरोप तय होना, मुल्जिम के बयान दर्ज करना, मोटर दुर्घटना अधिनियम से संबंधित चालान प्रार्थना पत्रों की सुनवाई, घरेलू हिंसा अधिनियम या पारिवारिक न्यायालय में चल रहे मुकदमों में होने वाली एकपक्षीय बहस, गवाही पूरी कर चुके मुकदमों में अंतिम बहस आदि कई ऐसे काम हैं, जिन्हें आसानी से वर्चुअल माध्यम से निपटाया जा सकता है।
कुल कार्यरत अदालतें 69
सेशन कोर्ट 26
( इसमें जिला जज के अलावा एससीएसटी एक्ट, ईसी एक्ट, गैंगस्टर एक्ट, पॉक्सो एक्ट, एनडीपीएस एक्ट की विशेष अदालतें व कंपनी मामलों की सुनवाई और सांसदों-विधायकों से संबंधित मामलों की सुनवाई व महिला अपराध से संबंधी मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष अदालतें और फास्ट ट्रैक कोर्ट भी शामिल।)
दीवानी अदालतें- 15
फौजदारी अदालतें- 21
(इसमें चार फास्ट ट्रैक कोर्ट भी शामिल, जहां दीवानी और फौजदारी दोनों मामलों की सुनवाई होती है।)
पारिवारिक न्यायालय 02
वाणिज्यिक न्यायालय 01
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण 02
अतिरिक्त न्यायालय 01
विशेष महानगर मजिस्ट्रेट 01
नोट : दो विशेष अदालतों में एनआई एक्ट से संबंधित मुकदमों की सुनवाई होती है। पारिवारिक न्यायालय, अतिरिक्त न्यायालय और विशेष महानगर मजिस्ट्रेट की कई अदालतें वर्तमान में खाली चल रही हैं।
चर्चित मामलों की सुनवाई भी ठप
पिंटू सेंगर हत्याकांड
किडनी कांड
गैंगस्टर जय वाजपेई के मामले
कर्नल नीरज गहलोत कांड
असम मॉडल दुष्कर्म कांड
महिला जज प्रतिभा हत्याकांड
ज्योति हत्याकांड
निशा केजरीवाल हत्याकांड
आदित्य उर्फ चंदू अपहरण कांड