मनरेगा मजदूरी के नाम पर फर्जीवाड़ा रोकने के लिए शासन ने नई व्यवस्था लागू की है। अब मजदूरों की ऑनलाइन हाजिरी लगेगी। एनएमएमएस (नेशनल मोबाइल मॉनीटरिंग सिस्टम) के माध्यम से कार्यस्थल पर मजदूरों की उपस्थिति दर्ज होगी। मजदूर को साफ्टवेयर के सामने आकर अपना चेहरा दिखाने के साथ ही पलक भी झपकानी होगी। ऐसा न करने पर उनकी अनुपस्थिति मानी जाएगी। यह व्यवस्था फरवरी से लागू होगी। जिले में 590 ग्राम पंचायतें हैं।
इन गांवों में मनरेगा के तहत कच्चा रास्ता, तालाब खोदाई, सुंदरीकरण, आंगनबाड़ी, प्रधानमंत्री आवास योजना, नाली, खड़ंजा निर्माण के कार्य में मनरेगा मजदूरों को लगाया जाता है। जिले में प्रत्येक माह करीब एक से डेढ़ करोड़ रुपये का भुगतान मनरेगा मजदूरी के नाम पर किया जाता है। अक्सर ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत कराए गए कार्यों में फर्जी मजदूर दिखाकर लाखों रुपये हड़पने की शिकायतें प्रधान और सचिवों के खिलाफ सीडीओ और डीएम के पास की जाती हैं।