उत्तर प्रदेश के महोबा में गुजरात और महाराष्ट्र से आ रहे एक हजार श्रमिकों को यूपी-एमपी की कैमाहा सीमा पुलिस ने रोक लिया। सैकड़ों किलोमीटर ट्रकों, गाड़ियों व पैदल आए इन श्रमिकों के स्वास्थ्य की जांच कराई गई।
फिर प्रशासन ने सभी को भोजन कराकर बस्ती, गोंडा, गोरखपुर व महाराजगंज के लिए रोडवेज बसों से रवाना कर दिया। महाराष्ट्र और गुजरात में मजदूरी करने गए श्रमिक लॉकडाउन बढ़ने के बाद घरों की तरफ भागने लगे हैं।
प्रवासी श्रमिक
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कोई बाइक, तो कोई ट्रकों और अन्य गाड़ियों व साइकिलों घरों की तरफ चल पड़े हैं। शुक्रवार को कैमाहा सीमा पर रोके गए एक हजार श्रमिकों को सीधे चंद्रभान सिंह महाविद्यालय ले जाया गया।
वहां पर सभी श्रमिकों के स्वास्थ्य की जांच के बाद भोजन की व्यवस्था कराई गई। फिर उन्हें रोडवेज बसों से उनके गृह जनपद के लिए भेजा गया। बस्ती, गोंडा, गोरखपुर और महाराजगंज के लिए 12 रोडवेज बसें लगाई गईं थीं।
गृह जनपद के लिए रवाना होने से पहले हरिसिंह, रामहेत समेत कई श्रमिकों ने बताया कि महानगरों में लॉकडाउन के बाद फैक्ट्रियां बंद हो गईं। जो पैसा था, एक माह में खत्म हो गया। इसके बाद भी लॉकडाउन बढ़ जाने पर वह घरों की तरफ भागने लगे। अब घर में चटनी रोटी खाकर रह लेंगे, लेकिन बाहर नहीं जाएंगे।