चकरनगर। सिरसा गांव में करूआ देव मंदिर पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन सुदामा चरित्र का प्रसंग सुनाया गया। इसके बाद हवन- पूजन के साथ समापन हो गया है।
कथा व्यास डॉ. राघवदास महाराज ने सुदामा चरित्र का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि सुदामा संसार में सबसे अनोखे भक्त रहे हैं। वह जीवन में जितने गरीब नजर आए, उतने वे मन से धनवान थे। उन्होंने कहा कि जब सुदामा भगवान श्रीकृष्ण ने मिलने आए तो उन्होंने सुदामा के फटे कपड़े नहीं देखे, बल्कि मित्र की भावनाओं को देखा।
मनुष्य को अपना कर्म नहीं भूलना चाहिए। अगर सच्चा मित्र है तो श्रीकृष्ण और सुदामा की तरह होना चाहिए। जीवन में मनुष्य को श्रीकृष्ण की तरह अपनी मित्रता निभानी चाहिए। मित्र पर संकट पड़ने पर उसका साथ देना चाहिए। समापन पर पं. संजीव शास्त्री ने विधि - विधान से हवन कराया। व्यास ने कहा इसी तरह लोग संकल्प कर लें तो पूरा गांव शराब मुक्त हो जाएगा। हाकिम सिंह यादव, नेमसिंह यादव, कुलदीप यादव, जयवीर यादव, राजवीर यादव, तिलक सिंह, माता प्रसाद, वीनेश, राकेश यादव रहे।