कानपुर। शहर में एक लाख लावारिस कुत्ते लोगों के लिए मुसीबत के सबब बने हुए हैं। इनमें कई कभी-कभी हिंसक हो जाते हैं जिस वजह से लोगों की जान खतरे में बन आती है। निगम लावारिस कुत्तों को पकड़वाता तो है लेकिन नसबंदी कर तीन दिन रखने के बाद उन्हें छोड़ दिया जाता है।
चकेरी के श्यामनगर में एक छात्रों को लावारिस कुत्ते ने काटा था। उसको 17 टांके लगवाने पड़े थे। घटना के बाद नगर निगम के पशु चिकित्सा विभाग ने शनिवार को श्यामनगर में अभियान चलाया। बच्ची को काटने वाले लावारिस कुत्ते के साथ ही 23 कुत्ते पकड़े गए। इन्हें फूलबाग स्थित एनिमन बर्थ कंट्रोल सेल ऑफ डॉग सेंटर ले जाया गया। पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. निरंजन सिंह ने बताया कि इन्हें तीन दिन सेंटर में रखा जाएगा और गाइडलाइन के अनुसार नसबंदी की जाएगी। कटखने या हिंसक कुत्तों को यहीं पर रोककर बाकी को रैबीज इंजेक्शन लगाकर वहीं छोड़ दिया जाएगा जहां से लाया गया है। डॉ. निरंजन सिंह ने बताया कि फूलबाग के अलावा किशनपुर में भी नगर निगम का डॉग सेंटर हैं। दोनों जगह मिलाकर हर दिन 60 कुत्तों (एक माह में 1800) की नसबंदी की जाती है। हिंसक कुत्तों को इन्हीं सेंटरों में चिकित्सकों की निगरानी में रखा जाता है।
9000 कुत्ते पालतू पर पंजीकृत सिर्फ 2100
शहर में लावारिस के अलावा करीब 9000 पालतू कुत्ते भी हैं। इनमें से नगर निगम में सिर्फ 2100 का ही पंजीकरण है। इन्हें पालने वाले समय-समय पर चेकअप कराते रहते हैं लेकिन कभी-कभी ये भी हिंसक हो जाते और हमला कर देते हैं।
मांस-मछली की दुकानों वाले क्षेत्र में कुत्ते ज्यादा हिंसक
डॉ. निरंजन का कहना है कि वैसे तो शहर में हर गली-मोहल्ले में लावारिस कुत्ते हैं लेकिन जहां मांस-मछली की दुकानें होती हैं उन इलाकों के कुत्ते अधिक हिंसक होते हैं। कारण ये है कि ऐसी जगहों पर कुत्तों को मांस के साथ जानवरों का रक्त भी मिलता है। खून व मांस की लत लग जाने से ये कुत्ते हिंसक हो जाते हैं।