स्रोत पर कटौती (टीडीएस) में हेरफेर करने वालों के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के ताजा प्रावधान मुसीबत खड़ी कर सकते हैं।
नए नियमों के अनुसार यदि किसी कंपनी, फर्म या व्यक्तिगत करदाता की जांच-पड़ताल में एक लाख से अधिक की टीडीएस चोरी पाई जाती है तो उसके खिलाफ विभाग अभियोजन (प्रॉसीक्यूशन) दाखिल कर सकेगा। इसके लिए बोर्ड ने स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर अपनाने को भी निर्देशित किया है।
गौरतलब है कि विभिन्न प्रकार के भुगतान पर विभाग ने टीडीएस की दरें निर्धारित की हैं। टीडीएस काटने के साथ अपने रिटर्न में उसे दर्शाने और संबंधित राशि को आयकर विभाग में जमा करने का प्रावधान है पर बहुत बड़ी तादाद में ऐसे मामले प्रकाश में आते हैं, जहां न केवल आम करदाता बल्कि सरकारी संस्थान भी टीडीएस कटौती करने में लापरवाही बरतते हैं।
कई बार तो जान-बूझकर टीडीएस चोरी करने की मंशा से भी ऐसा किया जाता है। विभाग ऐसे मामलों को रिटर्न की पड़ताल करके पकड़ता है और कार्रवाई करता है।
बोर्ड द्वारा 3 फरवरी को जारी दिशा-निर्देश के तहत यदि एक लाख रुपये से अधिक का टीडीएस काटा गया है और उसे निर्धारित तिथि तक जमा नहीं किया गया है तो अभियोजन की कार्रवाई सुनिश्चित रूप से की जाएगी।
रिकवरी की कार्रवाई भी साथ-साथ होगी। वहीं 25 हजार से एक लाख तक की टीडीएस चोरी पाए जाने की दशा में विभागीय अधिकारी इस बात का निर्णय लेंगे कि अभियोजन की कार्रवाई की जाए या नहीं। इसके लिए परिस्थितियों को देखने के बाद निर्णय लेने की बात बोर्ड ने कही है।
यह भी कहा है कि यदि किसी करदाता की लगातार दूसरी बार टीडीएस में हेरफेर करने की बात सामने आई है तो अभियोजन की कार्रवाई की जाएगी। वहीं 25 हजार से नीचे के मामलों में सामान्य विभागीय कार्रवाई होगी।
विभाग द्वारा आउटसोर्स की गई वेबसाइट ट्रेसेस डॉट कॉम पर रिटर्न के मिलान से एक लिस्ट तैयार की जाएगी। यह कार्रवाई तिमाही रिटर्न दाखिल होने के एक माह के भीतर हो जाएगी।
एक लाख से अधिक के मामलों के लिए लिस्ट-ए बनाई जाएगी। फिर इन्हें एक रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा, जिसमें संबंधित करदाता का नाम, पता, टैन और पैन नंबर आदि दर्ज किया जाएगा।
इसके बाद पूरी सूचना संबंधित टीडीएस कमिश्नर केे पास भेजी जाएगी, जहां से अभियोजन की कार्रवाई आगे बढ़ेगी। अभियोजन की कार्रवाई में छह माह की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा संबंधित राशि की ब्याज सहित रिकवरी भी की जाती है।