कानपुर। बालिका से सामूहिक दुष्कर्म के 26 साल पुराने मुकदमे में एक को विशेष न्यायाधीश एससीएसटी एक्ट सपना त्रिपाठी ने सात साल कैद और दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माने से पांच हजार रुपये पीडि़ता को मिलेंगे। मुकदमे में एक आरोपी की मौत हो चुकी है जबकि एक अन्य जमानत कराने के बाद से फरार चल रहा है।
जूही निवासी राजमिस्त्री की 12 वर्षीय बेटी के साथ घर के सामने रहने वाले 19 वर्षीय शिव कुमार पांडे व उसके साथी राजू और अजमेरी ने दुष्कर्म किया था। घटना के समय राजमिस्त्री अपनी पत्नी के साथ मजदूरी करने गया था जबकि बेटी घर में अकेली थी। शिवकुमार ने बेटी से पानी मांगा तो वह उसके घर पानी देने गई थी तभी शिवकुमार ने उसे कमरे में खींच लिया जहां राजू और अजमेरी पहले से मौजूद थे। तीनों ने उसके साथ मुंह पर कपड़ा ठूंस कर दुष्कर्म किया था। लहूलुहान हालत में पीडि़ता को देखकर क्षेत्रीय लोगों ने उसके पिता को जानकारी दी तब पिता ने जूही थाने में 17 जून 1999 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। तीनों को गिरफ्तार कर जेल तो भेज दिया गया था लेकिन तीनों ही जमानत पर छूट गए थे। जमानत मिलने के बाद शिवकुमार फरार हो गया जबकि मुकदमे की सुनवाई के दौरान राजू की मौत हो गई। सिर्फ अजमेरी के खिलाफ ही मुकदमे की सुनवाई हुई। अभियोजन की ओर से पीड़िता समेत कई गवाह कोर्ट में पेश किए गए। सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने अजमेरी को दोषी मानकर सजा सुनाई।