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इटावा: 11वें दिन सैफई मेडिकल कॉलेज में जारी रही हड़ताल खत्म, सफाई कर्मियों की मांगें मानी

Tue, 03 May 2022 02:29 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा

सार

सैफई मेडिकल कॉलेज में गंदगी और सफाई न होने पर चल रही कर्मचारियों की हड़ताल खत्म हो गई है। इससे पहले मंगलवार सुबह डॉक्टरों अैर स्वास्थ्यकर्मियों ने काम बंद करने की चेतावनी दी थी। इसी दौरान कर्मचारियों की अधिकारियों के साथ बैठक चल रही थी, जिसमें सफाईकर्मियों की मांगें मान ली गई हैं। 
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सैफई मेडिकल कॉलेज - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इटावा जिले के सैफई में 11 दिन से चल रही कर्मचारियों की हड़ताल मंगलवार सुबह खत्म हो गई। इस हड़ताल के चलते मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर की इमरजेंसी और वार्डों में गंदगी का अंबार लग गया है। इससे मरीजों और उनके तीमारदारों में संक्रामक बीमारियां फैलने का डर सता रहा था। वहीं, डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी भी जल्द सफाई न होने पर काम बंद करने की बात कह रहे थे। इधर, मंगलवर सुबह ही सैफई के एसडीएम, सीओ भी पहुंच गए हैं। पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में कुलपति, कुलसचिव और सफाई कर्मचारियों की बैठक हुई। इस बैठक में सफाई कर्मियों की मांगें मान ली गई हैं। 

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बता दें कि उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में कार्यरत सफाई कर्मचारियों द्वारा अपनी मांगों को लेकर चल रही हड़ताल का असर अब विश्वविद्यालय के इमरजेंसी ट्रामा सेंटर से लेकर हर एक वार्ड में धीरे-धीरे दिखाई देने लगा था। वार्डों में जगह-जगह कचरे ढेर लगने शुरू हो गए हैं। सबसे बुरा हाल इमरजेंसी ट्रामा सेंटर के वार्डो का है। गंदगी से दुर्गंध उठने लगी है और वार्डो में भर्ती मरीज व उनके तीमारदारों का जीना मुश्किल हो गया है। कोई इमरजेंसी ट्रामा सेंटर में मौजूद डॉक्टर स्टाफ ने कहा कि अगर साफ सफाई नहीं हुई, तो हम लोग भी काम करना बंद कर देंगे।

हड़ताल से वार्ड में फैली हुई गंदगी - फोटो : अमर उजाला
विश्वविद्यालय के कुलसचिव सुरेश चंद्र शर्मा, एसडीएम ज्योत्सना बंधु, सैफई सीओ विजय सिंह ने हड़ताल पर सफाई कर्मचारियों को समझाने की कोशिश की गई, लेकिन सभी सफाई कर्मचारियों की एक ही मांग थी कि हमें विश्वविद्यालय के अधीन किया जाए। इससे हम लोगों के परिवार पालने में कोई दिक्कत का सामना न करना पड़े और कोविड-19 के दौरान लगातार हम लोगों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए काम किया था, लेकिन हम लोगों को विश्वविद्यालय ने नजर अंदाज करते हुए जो हम सफाई कर्मचारियों की तनख्वाह मिल रही थी।

ट्रामा वार्ड में लगे गंदगी के ढेर - फोटो : अमर उजाला
उस में  भी 50% की कटौती करने की ठान ली। एसडीएम के सामने सफाई कर्मचारियों के आंसू निकलने लगे। इसके बाद प्रशासनिक भवन में सफाई कर्मचारियों के मेल लीडर और प्रशासनिक भवन में मौजूद अधिकारियों के बीच बात हो रही थी। उधर, इमरजेंसी ट्रामा सेंटर में मौजूद डॉक्टर स्टाफ ने स्पष्ट कर दिया था कि अगर गंदगी रही तो हम लोग भी काम नहीं करेंगे। बताते चलें उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में कार्यरत सुरक्षा की एजेंसी उत्तर प्रदेश पूर्व सैनिक कल्याण निगम के माध्यम से कार्यरत 58 सफाई कर्मचारियों को विश्वविद्यालय प्रशासन ने निकालकर ठेका प्रथा से जोड़ने का निर्णय लिया।

यह है कर्मचारियों का कहना
पिछले 11 दिन से 58 सफाई कर्मचारियों द्वारा काम बंद के हड़ताल की जा रही थी। रविवार को ठेके के माध्यम से कार्यरत 350 सफाई कर्मचारियों ने उनका समर्थन करते हुए सामूहिक रूप से काम बंद करके हड़ताल कर दी। विश्वविद्यालय के कुलपति के जिंदाबाद व कुलसचिव मुर्दाबाद के जमकर नारेबाजी और कहां विश्वविद्यालय में सभी कर्मचारी पिछले 15 वर्षों से कार्यरत हैं। कोरोना महामारी के विषम परिस्थितियों में सभी कर्मचारियों ने जिम्मेदारी से ड्यूटी निभाई, लेकिन यहां विश्वविद्यालय के कुलसचिव नए नए नियम निकालकर कुलपति को गुमराह करके हम छोटे कर्मचारियों का शोषण कर रहे हैं। जिसको हम लोग बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे।
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500 रुपये अतिरिक्त भत्ते की मांग
हम सभी कर्मचारी मांग कर रहे हैं, पूर्व में जो निर्धारित वेतन व समय सारणी के हिसाब से ड्यूटी करते आ रहे हैं। उसी हिसाब से ड्यूटी कराई जाए इसमें कोई बदलाव नहीं किया जाए। इसके अलावा हम कर्मचारियों ने कोरोना काल में बड़े ही जोखिम से काम किया था। उस समय 500 रुपये अतिरिक्त भत्ता देने की बात कही गई थी। वह आज तक नहीं दिया गया। उसको दिया जाए।

हॉस्टलों का भी बुरा हाल
एमबीबीएस छात्रों ने भी विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की जल्द ही कुछ ना कुछ सफाई कर्मचारियों का समाधान करें हॉस्टलों की स्थिति बहुत खराब हो गई है। 2 दिन से लगातार सफाई ना होने के चलते हॉस्टलों में गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। इससे स्टूडेंट्स को बड़ी परेशानी से गुजरना पड़ रहा है।
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