कानपुर देहात में मंगलपुर थाने के दशहरी गांव में बुधवार को सेंगुर नदी में स्नान करने गए किसान राम चंद्र जोशी पानी में डूब गया। देर शाम तक वह घर नहीं पहुंचे, तो परिजनों ने तलाश शुरू की। उनके कपड़े नदी किनारे घाट पर रखे मिले।
गुरुवार सुबह परिजनों नदी में तलाश शुरू कराई, तो उनका शव मिल गया। घर में रामचंद्र की पौत्री की शादी की तैयारियां चल रही थीं। गुरुवार को (आज) हरदोई से उसकी बरात आ रही है। परिजनों ने पुलिस को बिना सूचना दिए शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
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पौत्री के लिए बाबा की ओर से खरीदा गया दहेज का
- फोटो : अमर उजाला
दशहरी गांव निवासी किसान रामचंद्र जोशी (58) बुधवार को गांव के बाहर से निकली सेंगुर नदी में नहाने गए थे। राम चंद्र की पौत्री कल्पना की गुरुवार को शादी है। इसकी तैयारियां घर में चल रही थी। परिवार के लोग तैयारियों में व्यस्त थे।
किसी ने उनके घर न आने पर ध्यान नहीं दिया। जब देर शाम वह घर में नजर दिखाई नहीं दिए, तो परिजनों ने उनकी खोजबीन शुरू की, लेकिन रात में उनका कुछ पता नहीं चला।
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रोते बिलखते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
गुरुवार की सुबह गांव के एक व्यक्ति ने उनके कपड़े नदी किनारे घाट पर रखे देखे और रामचंद्र के बेटे राधाकृष्ण को सूचना दी। इसके बाद राधा कृष्ण व परिवार के तमाम लोग मौके पर पहुंचे गए। परिजनों ने ग्रामीणों की मदद से नदी से शव को बाहर निकाला। इसके बाद घाट पर ही अंतिम संस्कार कर दिया।
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दशहरी गांव में सूना पड़ा मंडप
- फोटो : अमर उजाला
मंगलवार को पौत्री का तिलक लेकर रामचंद्र गौसगंज हरदोई गए थे। घर में शादी की जोर शोर से तैयारियां चल रही थीं। रामचंद्र की मौत से शादी की खुशियां मातम में बदल गईं। राधाकृष्ण ने बताया कि पिता को मिर्गी का दौरा आता था। थाना प्रभारी शिवकुमार राठौर ने बताया कि उन्हें घटना की जानकारी नहीं मिली है।
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शादी की तैयारी का बिखरा पड़ा सामान
- फोटो : अमर उजाला
अधूरे रह गए पौत्री के पैर पूजने के अरमान
दशहरी गांव निवासी रामचंद्र जोशी पांच बेटों में सबसे बड़े बेटे राधाकृष्ण के साथ रहते थे। रामचंद्र कल्पना से विशेष स्नेह रखते थे। उसकी शादी में कोई कमी न रह जाए। इसके लिए वह खुद हर इंतजाम के बारे जानकारी करते थे। बुधवार से लापता हुए रामचंद्र की तलाश को लेकर घर के लोग परेशान थे। गुरुवार की सुबह बरात के स्वागत की तैयारियां करनी थी।
तब घर के लोग नदी में उनका शव ढूंढने में रहे थे। शव मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। परिवार के कुछ लोगों ने शादी की रस्में सादगी के साथ निभाने के लिए तैयारियां करवाई। रामचंद्र की मौत से बेटे राधा कृष्ण, मोहनलाल, राम भरोसे, बाबूराम व पंकज का रो रो कर बुरा हाल है। गांव वालों ने बताया कि पौत्री के पैर पूजने के रामचंद्र के अरमान अधूरे रह गए।
शादी की तैयारी का बिखरा पड़ा सामान
- फोटो : अमर उजाला
दहाड़े मार कर रो पड़ी
शादी के दिन बाबा रामचंद्र की मौत से कल्पना बदहवास है। रो-रो कर उसका बुरा हाल है। घर में शादी की तैयारियां जहां की तहां रोक दी गईं। शादी की केवल रस्म अदायगी के लिए खानापूरी होती रही। कल्पना के पिता राधाकृष्ण ने बताया कि सादगी के साथ वैवाहिक कार्यक्रम की रस्में अदा की जाएगीं।