संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली और द ग्रेट गुलाब थियेटर कानपुर की ओर से मर्चेंट चैंबर हाल में आयोजित लोक एवं पारंपरिक अभिव्यक्ति के उत्सव ‘देशज’ के तीसरे दिन शुक्रवार को नौटंकी की ताकत बताई गई। मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘बूढ़ी काकी’ का मंचन करके संदेश दिया गया कि बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए।
उम्र के अंतिम पड़ाव पर जाकर बुजुर्ग व्यक्ति बच्चों जैसी हरकतें करते हैं। ऐसे में उन्हें संभालने की जरूरत होती है। स्वर्ग रंग मंडल इलाहाबाद लोक कला और लोक नाट्य नौटंकी को समर्पित संस्था है। इसके 35 सदस्यीय कलाकारोें ने शुक्रवार को झकझोरने वाली नौटंकी की प्रस्तुति दी। संगीत नाटक अकादमी से सम्मानित अतुल यदुवंशी ने नौटंकी की परिकल्पना और निर्देशन किया।
सोनम सेठ ने बूढ़ी काकी का दमदार रोल अदा किया। मूल कथा का नौटंकी रूपांतरण राजकुमार श्रीवास्तव ने किया। धीरज अग्रवाल, शालिनी श्रीवास्तव, नीरज अग्रवाल, प्रिया मिश्र, संदीप शुक्ल, आर्यन मोहिले, अद्वितीय, अनन्या नोहिले ने बेहतरीन प्रदर्शन किया।
वस्त्र विन्यास शिल्पी मोहिले, मेकअप मोहम्मद हमीद, मंच निर्माण गौरव बजाज और संदीप शुक्ल, प्रकाश संचालन सुजॉय घोषाल, मंच सामग्री शुभम श्रीवास्तव और अमित भारती ने संभाला। ‘देशज’ उत्सव अब कन्नौज मेें 16 से 18 जुलाई के बीच ठठिया फूलमति मंदिर में होगा।
कौरवी लोकगीत का रंग भी जमा
‘देशज’ के आखिरी दिन जमील खां की टीम ने नक्कारा वादन किया। ब्रह्मपाल सिंह नागर की टीम ने यूपी की कौरवी लोकगीत रागिनी की प्रस्तुति दी। चिंतामणि ने सह गायिका की भूमिका निभाई। मध्य प्रदेश की नौटंकी ‘बाबू जी’ का भी मंचन हुआ।