कानपुर। हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एचबीटीयू) के दीक्षांत समारोह में ऑयल टेक्नोलॉजी के छात्रों को पदक नहीं मिलेगा। यह व्यवस्था सख्त मानकों की वजह से है। ऑयल टेक्नोलॉजी के छात्र पहले प्रयास में परीक्षा पास नहीं कर सके हैं। लेदर टेक्नोलॉजी में केवल एक छात्र को स्वर्ण पदक दिया जाएगा।
एचबीटीयू का दीक्षांत समारोह 10 जुलाई को है, जिसमें 46 मेधावियों को पदक दिए जाएंगे। इलेक्टि्रकल इंजीनियरिंग के प्रज्ञान वर्मा को कुलाधिपति स्वर्ण पदक से सम्मानित किया जाएगा। कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग की रैना दीक्षित को रजत और तनिष्का शर्मा को कांस्य पदक से नवाजा जाएगा। ऑयल टेक्नोलॉजी के छात्र इस बार पदक पाने से वंचित रहेंगे। कारण संस्थान में दीक्षांत में उन्हीं मेधावियों को पदक दिया जाता है जो पाठ्यक्रम को प्रथम प्रयास में बिना किसी कैरी ओवर के उत्तीर्ण करते हैं। यदि किसी छात्र का किसी भी विषय में कैरी ओवर रहा हो, भले ही उसने बाद में परीक्षा पास कर ली हो, तब भी वह पदक का पात्र नहीं माना जाता। यही कारण है कि ऑयल ब्रांच के छात्र को तीनों और लेदर टेक्नोलॉजी के रजत और कांस्य पदक नहीं मिलेगा। हालांकि छात्रों का मानना है कि यह नियम काफी कठोर हैं और कई योग्य छात्र केवल तकनीकी कारणों से पदक से वंचित रह जाते हैं।
डीन एकेडमिक्स प्रो. वंदना कौशिक का कहना है कि नियमों का उद्देश्य शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देना और छात्रों को निरंतर बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करना है। छात्र का पहले ही प्रयास में पास होना अनिवार्य है। भले ही कैरीओवर छात्र के पहले प्रयास में उत्तीर्ण होने वाले से बेहतर सीजीपीए हो, लेकिन नियमत: पहले प्रयास वाले छात्र को ही मेडल दिया जाता है।