कानपुर देहात। रनियां के खानचंद्रपुर व इसके आस-पास के क्षेत्र में 20 साल से अधिकर समय तक क्रोमियम डंप रहा। इससे दूषित हुए भूजल से लोगों के शरीर में क्रोमियम, मरकरी व फ्लोराइड जैसे घातक तत्व पहुंच गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अक्तूबर से लेकर मार्च माह तक 1028 लोगों की जांच कराई। जांच में 947 में मानक से अधिक क्रोमियम, 45 में मरकरी पाया जा चुका है। हालांकि स्वास्थ्य अधिकारी किसी में गंभीर बीमारी के लक्षण न मिलने की बात कह रहे हैं।
खानचंद्रपुर-मटियामऊ मार्ग पर 20 साल से अधिक समय तक क्रोमियम डंप रहने से यहां का भूजल दूषित हो गया है। यहां तक कि कुछ क्षेत्र के पानी का रंग एक दम से पीला पड़ गया है। खानचंद्रपुर, उमरन समेत आस-पास लगे हैंडपंप पीला दूषित पानी देते हैं। हालांकि इसके इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक है। जिला प्रशासन के निर्देश पर गांव में सरकारी हैंडपंप से हत्थे भी हटवा लिए गए हैं लेकिन कुछ लोगों के घरों में हैंडपंप आज भी लगे हैं जिनसे दूषित पानी निकलता है। लोग इसे कपड़े धोने व मवेशियों को पिलाने में इस्तेमाल कर रहे हैं। समय-समय पर अधिकारी लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक भी करते रहते हैं।
इधर सालों से क्रोमियम कचरा डंप रहने व दूषित भूजल का प्रयोग करने से लोगों के शरीर में मानक से अधिक क्रोमियम, मरकरी व फ्लोराइड जैसे घातक तत्व पहुंच गए हैं। इस बात का खुलासा अब स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट में हो रहा है। एनजीटी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने अक्तूबर 2025 से स्वास्थ्य शिविर लगाकर लोगों की जांच कराने के लिए सैंपल लेने का अभियान शुरू किया था। पिछले माह मार्च में 18 से 28 मार्च तक 336 व्यक्तियों के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए थे। सोमवार को आई जांच रिपोर्ट में 315 में मानक से अधिक क्रोमियम, 18 में 20 माइक्रोग्राम प्रति लीटर से अधिक क्रोमियम पाया गया है।
सीएमओ डॉ. एके सिंह ने बताया कि अक्तूबर से लेकर मार्च तक अलग-अलग चरणों में रनियां औद्योगिक क्षेत्र स्थित ग्राम पालनपुरवा, केशवनगर, उमरन, बजरंग नगर, आंबेडकर नगर, श्याम सुंदर नगर, यादवपुरवा, शिवनाथपुरवा, चौहानपुरवा, धनारामपुर में 1028 व्यक्तियों के खून, पेशाब के सैंपल लिए गए। इनमें से अब तक आंशिक रूप से 947 में क्रोमियम की मात्रा अधिक पाई गई है। जबकि 45 में आंशिक रूप से अधिक मरकरी पाई गई है। वहीं फ्लोराइड की जांच भी कराई गई है। जिसमें 25 लोगों में फ्लोराइड पाया गया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में रनियां, सरवनखेड़ा के स्वास्थ्य केंद्र प्रभारियों के नेतृत्व में टीमें लगाई गई हैं। जो प्रभावित क्षेत्र में लोगों का सर्वे करने के साथ खून में घुले भारी तत्वों का पता लगाने के लिए रक्त व पेशाब के नमूने जुटा रही हैं।
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सर्वे में ग्रामीणों ने बताई थी समस्याएं
स्वास्थ्य विभाग ने एनजीटी के निर्देश पर जांच का दायरा बढ़ाने के साथ ही क्रोमियम प्रभावित क्षेत्र के लोगों में बीमारी के लक्षण जांचने के लिए एक माह पहले सर्वे कराया था। स्वास्थ्य टीमें गांव पहुंची तो लोगों में एंजाइटी, खुजली, पेट दर्द आदि की समस्याएं निकल कर सामने आई थीं। भारी तत्वों के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए स्वास्थ्य अधिकारियों ने विशेष सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। सरवनखेड़ा पीएचसी अधीक्षक डॉ. राकेश यादव ने बताया कि क्रोमियम प्रभावित क्षेत्र के लोगों को उपचार में कोई परेशानी न हो इसको लेकर रनियां पीएचसी के एक कक्ष में कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा। प्रभावित क्षेत्र के लोग प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम छह बजे तक संपर्क कर अपनी समस्या बता सकते हैं। इसके लिए एक नंबर भी जारी किया जाएगा। फिलहाल स्वास्थ्य शिविर लगा कर लक्षण जांचे जा रहे हैं। जिनमें मानक से अधिक क्रोमियम, मरकरी पाया गया है, उनकी विशेष निगरानी की जाएगी।
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95 हजार मीट्रिक टन डंप था क्रोमियम कचरा
खानचंद्रपुर मटियामऊ रोड पर करीब 95 हजार मीट्रिक टन क्रोमियम डंप था। एनजीटी की सख्ती दिखाने के बाद कुंभी स्थित रैमिकी कंपनी को 89, 500 मीट्रिक टन व भारत ऑयल एंड वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी को 5500 मीट्रिक टन क्रोमियम उठाने की जिम्मेदारी दी गई थी। दोनों कंपनियों ने अपने तय लक्ष्य के सापेक्ष क्रोमियम की उठान करवा ली है। डंप स्थल पर कुछ मिट्टी में मिश्रित क्रोमियम पड़ा हुआ है। इसके भी निस्तारण की तैयारी चल रही है। यहां पर टिनशेड व बाउंड्रीवाल भी कराई जानी है।
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क्रोमियम, मरकरी से यह हो सकती समस्या
सीएमओ डाॅ. एके सिंह ने बताया कि स्वस्थ्य शरीर में 1.5 माइक्रोग्राम प्रति लीटर क्रोमियम, 20 माइक्रोग्राम प्रति लीटर मरकरी होना चाहिए। जिनके शरीर में मानक से अधिक क्रोमियम पहुंच जाता है उनके शरीर में खुजली, शरीर में चकत्ते, दांतों का पीला होना और मसूड़ों में सूजन आदि जैसे लक्षण दिखने लगते हैं। लिवर पर भी असर पड़ने लगता है। इसी तरह मरकरी की मात्रा अधिक होने पर क्रिटनिन बढ़ने लगता है। इस लिए प्रभावित क्षेत्र के लोगों की एलएफटी, केएफटी जांच भी कराई जा रही है। फिलहाल किसी में गंभीर लक्षण नहीं मिल रहे हैं। सभी व्यक्ति स्वस्थ्य पाए गए हैं।
......................रामानुजन फैकल्टी कर चुकी पानी पर शोध
पिछले साल दिल्ली आईआईटी की रामानुजन फैकल्टी की टीम के प्रोफेसर डॉ. पंकज गुप्ता के नेतृत्व में टीम ने यहां करीब 200 फीट गहराई में पानी में शोध किया था। कई जगह बोर करने, ई-माइक्रोबायोम तकनीकी से पानी को शुद्ध कर निकाला था। इसके बाद जर्मनी की टीम ने भी सर्वे कर भूजल में क्रोमियम के स्तर व कब से क्रोमियम का असर है। इसके लिए पेड़ों के तने से नमूने लिए थे। इसके बाद से सब कुछ ठंडा पड़ा है। स्थानीय लोग भी अब समाधान की मांग कर रहे हैं।