उलमा और बुद्धिजीवियों के प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि सिर्फ मुसलमानों को ही दोषी मानते हुए गिरफ्तारियां की गईं। पुलिस की कार्रवाई पूरे प्रकरण में निष्पक्ष नहीं रही।
कानपुर शहर में देवबंदी, बरेलवी समेत सभी मसलकों के उलमा और बुद्धिजीवियों का प्रतिनिधिमंडल सोमवार को पुलिस कमिश्नर विजय सिंह मीणा से मिला। पुलिस की एकतरफा कार्रवाई पर उन्हें दो टूक कहा कि पुलिस की कार्रवाई पूरे प्रकरण में निष्पक्ष नहीं रही।
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पुलिस कमिश्नर से नूपुर शर्मा पर वैधानिक कार्रवाई की मांग की। तीन जून को परेड-नई सड़क पर हुई निंदनीय घटना में पत्थरबाजी के फुटेज पर सिर्फ एक समुदाय पर ही कार्रवाई का आरोप लगाया। सिर्फ मुसलमानों को ही दोषी मानते हुए गिरफ्तारियां की गईं। सात जून को पुलिस अफसरों ने 169 सीआरपीसी के तहत गिरफ्तार बेगुनाहों को छोड़ने के लिए 20 लोगों के चिह्नित किया गया था, लेकिन एक भी व्यक्ति गिरफ्तार नहीं हुआ।
शहर के संभ्रांत व्यक्तियों को अखबारों और चैनलों पर बिना आधार के बदनाम किया जा रहा है। इसे भी रोकने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल में बरेलवी शहरकाजी मुफ्ती साकिब अदीब, देवबंदी शहरकाजी हाफिज मामूर अहमद, देवबंदी नायब शहरकाजी मौलाना अब्दुल्ला मजाहिरी, बरेलवी नायब शहरकाजी हाफिज सगीर आलम हबीबी, जमीयत उलमा के प्रदेश उपाध्यक्ष अब्दुल्ला मजाहिरी, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मोहम्मद सुलेमान, मौलाना असगर अली यार अलवी आदि मौजूद रहे।