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अब जले हुए तेल से फर्राटा भरेंगे वाहन, प्रयोग हुआ सफल, जानिए आपकी जेब पर पड़ेगा क्या असर

Sat, 18 May 2019 03:10 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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प्रतीकात्मक फोटो
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जले तेल से बायो डीजल बनाकर वाहनों में प्रयोग किया जाएगा। एनसीआर दिल्ली में पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद कानपुर में यह प्रयोग किया जाएगा। बड़े होटलों और रेस्टोरेंट से तीन बार प्रयोग के बाद जला तेल इकट्ठा कर एक संस्था बायो डीजल बनाएगी। इससे दो फायदे होंगे। तीन बार प्रयोग किए गए तेल में बने खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं। इसलिए इसका प्रयोग रुकेगा। बायो डीजल से वाहन चलने पर प्रदूषण भी कम फैलेगा।
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यूज कुकिंग ऑयल (यूसीओ) को बार-बार प्रयोग करने पर हीट से एक रासायनिक यौगिक (टोटल पोलर कपाउंड) बढ़ जाता है। यह सेहत के लिए हानिकारक है। इससे पेट संबंधी कई रोग हो जाते हैं। फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) ने इसके बार-बार प्रयोग को रोकने के लिए बायो डीजल बनाने की पहल की।

जले हुए तेल का पैसा भी लोगों को दिया जाता है

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग से कहा कि तेल का प्रयोग बार-बार न करने के लिए लोगों को जागरूक किया जाए। बड़े होटलों और रेस्टोरेंट में इसके प्रयोग पर रोक लगाई जाए। संस्थाओं या उद्यमियों के माध्यम से जले तेल से बायो डीजल बनाना शुरू किया जाए। जिस तरह पेट्रोल में सात से 10 प्रतिशत तक इथेनॉल का प्रयोग होता है। उसी तरह डीजल में जले तेल का कुछ फीसदी अंश प्रयोग किया जाता है।

एनसीआर दिल्ली में शिवा विज बायो डीजल इनर्जी प्राइवेट लिमिटेड ने जले तेल से बायो डीजल बनाना शुरू किया। इस समय यह कंपनी आठ सौ घरों से जला हुआ तेल इकट्ठा कर ईंधन के रूप में प्रयोग कर रही है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के अभिहित अधिकारी विजय प्रताप सिंह ने बताया कि जले हुए तेल का पैसा भी लोगों को दिया जाता है। इससे स्वास्थ्य के लिए खतरनाक जले हुए तेल का निस्तारण सही ढंग से होगा।

 
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जानकारी के लिए सर्वे शुरू किया गया

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग उत्तर प्रदेश की अपर मुख्य सचिव अनीता भटनागर जैन ने कानपुर में यह प्रयोग करने को कहा है। दरअसल, जब होटल संचालकों को तीन बार से ज्यादा प्रयोग तेल में खाद्य पदार्थ न बनाने को कहा जाता है तो उनका तर्क होता था कि वह खुद ही जला तेल फेंक देते हैं। अब 25 लीटर तक और इससे ज्यादा प्रतिदिन तेल प्रयोग करने वाले बड़े होटलों और रेस्टोरेंट की जानकारी के लिए सर्वे शुरू किया गया है। सर्वे के बाद देखा जाएगा कि इन बड़े होटलों और रेस्टोरेंट से हर रोज कितना जला हुआ तेल मिल जाएगा। इसके बाद बायो डीजल बनाने पर काम शुरू होगा। जला तेल देने के बदले होटल संचालकों को पैसा भी मिलेगा।

शहर में जले तेल से बायो डीजल बनाने के लिए एक संस्था तैयार हो गई है। मुख्य विकास अधिकारी अक्षय प्रताप सिंह ने संस्था का प्रजेंटेशन भी देख लिया है। इस संस्था के साथ बड़े होटलों और रेस्टोरेंट संचालकों की बैठक कराई जानी थी। लोकसभा चुनाव के कारण इस दिशा में काम तेजी से नहीं हो सका। मतगणना के बाद इस काम में तेजी लाई जाएगी।
-विजय प्रताप सिंह, अभिहित अधिकारी
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