पिछले कई दिनों से वन विभाग की टीम का सिर दर्द बना बाघ अब पहुंच से ज्यादा दूर नहीं है। बाघ पहाड़पुर गांव के आसपास ही घूम रहा है। इसकी पुष्टि वन विभाग के अधिकारियों ने की है।
अधिकारियों का दावा है अब बाघ ज्यादा दिन खुला नहीं घूम पाएगा। विभाग की टीम उसे शीघ्र ही पकड़ लेगी। इसकी वजह उन्होंने शिकार के लिए बांधा गया पाड़ा को बताया है।
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक बाघ ने पाड़े को मारकर आधा खाया है। आधा हिस्सा पहाड़पुर गांव में ही बरामद हुआ है। इसके अलावा बुधवार को दोबारा बाघ के पैरों के निशान मिले हैं।
मालूम हो कि 13 नवंबर को कानपुर में जहां सबसे पहली बार (पहाड़पुर गांव) बाघ को देखा गया था।बुधवार को एक बार फिर से उसी इलाके में बाघ के निशान मिले है।
डीएफओ डॉ. रामकुमार ने बताया कि टीम द्वारा बांधे गए पाड़े को बाघ ने शिकार बनाया है, यह उसके पहाड़पुर गांव में होने की पुष्टि करता है।
बाघ को पकड़ने के लिए बुधवार की रात को दूसरा पाड़ा पिंजड़े के पास बांधा गया है और डिजिटल कैमरे भी लगाए गए है। उन्होंने कहा कि बाघ पूरी तरह से टीम की प्लानिंग के मुताबिक चल रहा है।
अगर बुधवार को पिंजड़े के पास बंधे पाड़े को खाता है तो तीसरे दिन उसे केज के भीतर बांधा जाएगा। उन्होंने कहा कि हाथियों पर कांबिंग न करके ट्रैकिंग की जा रही है।