लघु उद्योग मंत्री की अध्यक्षता में बुधवार को लखनऊ में आयोजित बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। इसमें लखनऊ, कानपुर और नोएडा समेत पांच जिलों में विकास भवन की तर्ज पर उद्योग भवन बनाने की बात तय हुई है।
साथ ही प्रधानमंत्री स्वरोजगार योजना की तरह मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना शुरू करने पर भी सहमति बनी है। प्रदेश के लघु उद्यमियों के उत्पादों की ब्रांडिंग के लिए लखनऊ में एक एक्जिबिशन सेंटर बनाया जाएगा।
उद्योगों के विकास और उन्हें सहूलियत प्रदान करने के मकसद से लघु उद्योग मंत्री भगवत शरण गंगवार की अध्यक्षता में बैठक हुई।
इसमें प्रमुख सचिव भारी उद्योग संजीव शरण, प्रमुख सचिव लघु उद्योग महेश गुप्ता, यूपीएसआईडीसी के प्रबंध निदेशक मनोज सिंह और डायरेक्टर ऑफ इंडस्ट्रीज वेंकटेश्वर लू समेत प्रदेश भर के अधिकारी मौजूद रहे।
इसमें यह तय किया गया कि विकास भवन की तरह लखनऊ, कानपुर, नोएडा आदि पांच जिलों उद्योग भवन बनाए जाएंगे। दो जिलों के लिए प्रस्ताव मांगे गए हैं।
इन भवनों में उद्योग निदेशालय, यूपीएसआईडीसी, यूपीएसआईसी और प्रदूषण के क्षेत्रीय कार्यालय होंगे। यहां जिला स्तरीय उद्योग बंधु की बैठक भी आयोजित की जाएगी। इसके अलावा सिंगल विंडो सिस्टम सुविधा उपलब्ध होगी।
लघु या भारी उद्योगों की स्थापना के लिए दी जाने वाली सुविधाएं और रियायतों का फैसला यहीं से होगा। बैठक में दूसरा महत्वपूर्ण निर्णय लखनऊ में राज्य स्तर पर एक एक्जिबिशन सेंटर को तैयार करने से जुड़ा है।
इसमें प्रदेश भर के लघु एवं सूक्ष्म उद्योगों से जुड़े उत्पादों का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त हैंडीक्राफ्ट, हैंडलूम, सिल्क, ऑटो, बुक आदि से जुड़े मेलों का आयोजन किया जाएगा।
इसके लिए भूमि तलाशने का काम यूपीएसआईडीसी करेगा और अवस्थापना निधि से इसके लिए फंडिंग होगी। एक अन्य फैसले में प्रधानमंत्री स्वरोजगार योजना की तर्ज पर मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना लाई जाएगी।
इसमें उन लोगों को कवर किया जाएगा जो किन्हीं कारणों से प्रधानमंत्री स्वरोजगार योजना में शामिल नहीं हो पाते हैं।
डीएम कर सकेंगे हजार मीटर के भूखंड का आवंटन
बैठक में यह भी तय हुआ है कि यूपीएसआईडीसी के ऐसे भूखंड जिनका क्षेत्रफल एक हजार वर्ग मीटर तक है। उनके आवंटन और कैंसिलेशन का अधिकार अब जिलाधिकारी को दिए जाने पर भी सहमति बनी है।
जल्द ही इस संबंध में शासनादेश जारी होगा। वहीं सिंगल विंडो सिस्टम को सख्ती से लागू करने के लिए अन्य प्रदेशों की तरह एक्ट बनाकर लागू करने पर चर्चा हुई है, मगर अभी इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है।