सौर ऊर्जा से होता है संचालित
छात्रों ने बताया कि दवा के छिड़काव के दौरान किसानों को काफी मेहनत करनी पड़ती है। किसान दवा से भरे भारी स्प्रिंकल सेट को पीठ पर लादे रहते हैं। कई कीटनाशक ऐसे हैं जो मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक होते हैं। किसानों को मुंह ढंक कर इनका छिड़काव करना होता है इसके बावजूद कई बार प्रतिकूल प्रभाव देखा गया है। तीनों छात्रों ने विभाग के प्रो. जीएल देवनानी के नेतृत्व में इसे तैयार किया है। यह पूरी तरह से सौर ऊर्जा से संचालित होता है । स्प्रे नोजल से दूर रहकर इसे हाथों से नियंत्रित किया जाता है।
तैयार करने में 20 हजार रुपये से ज्यादा लगे हैं
इसका वजन हल्का होने के साथ एक समय पर कई नोजल से दवा का छिड़काव होता है। दो पहियों की साइकिल के ऊपर दवा का टैंक लगाया गया है। नोजल स्प्रेयर की दो पट्टियां लगाई गईं हैं, जिनमें एक साथ 12 नोजल लगाए जा सकते हैं। मशीन को ऊर्जा देने के लिए बैटरी लगाई गई है जो स्प्रेयर के ऊपरी हिस्से में लगे सोलर पैनल से चार्ज होती रहती है। प्रो. देवनानी ने कहा कि इस उपकरण का प्रमुख उपयोग चना, सब्जियों और छोटे पौधों पर प्रभावी रूप से किया जा सकता है। अभी इसे तैयार करने में 20 हजार रुपये से ज्यादा लगे हैं।