कानपुर के अपने मेडिकल कॉलेज ने स्टेम सेल थैरेपी के क्षेत्र में एक कदम और आगे बढ़ा दिया है। अब यहां रोगियों का इलाज स्टेम सेल के ग्रोथ हारमोंस से किया जाएगा। अभी तक रोगी को पूरी स्टेम सेल दी जाती रही है। ग्रोथ हारमोंस से रोगी को त्वरित, प्रभावी और सटीक इलाज हो सकेगा। कॉलेज की एथिक्स कमेटी ने भी इसकी अनुमति दे दी है। ग्रोथ हारमोंस से थैरेपी शुरू करने वाला जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज प्रदेश का पहला चिकित्सा संस्थान होगा। कॉलेज ने इस क्षेत्र में अन्य शोधों को परखने के लिए एक पैनल भी गठित कर दिया है।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि इलाज के लिए अभी पूरी स्टेम सेल दी जाती है, लेकिन स्टेम सेल के कई अवयव इलाज के लिए जरूरी नहीं होते हैं। स्टेम सेल का सबसे महत्वपूर्ण भाग ग्रोथ हारमोंस होते हैं। इन्हें एक्सोसोम कहा जाता है। ये स्टेम सेल के संदेशवाहक का काम करते हैं। एक्सोसोम संबंधित अंग को विकसित करने का काम करते हैं, जिससे वहां कोशिकाएं काम शुरू कर देती हैं। अंग की मरम्मत शुरू हो जाती है।