ओएसटी सेंटर में व्यसन के लती को दवा के साथ उसकी काउंसलिंग भी की जाती है। कुछ मामलों में इसका अच्छा प्रभाव भी देखा गया है और कुछ लोगों ने नशे से मुक्ति भी पा ली है। राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी के सहयोग से जिला अस्पताल में ओएसटी सेंटर 12 अगस्त 2014 में शुरू हुआ था।
281 मरीज हो चुके हैं पंजीकृत
अब तक 281 मरीज पंजीकृत हो चुके हैं। इसमें 255 दवाएं ले रहे हैं। इसमें 17 साल से लेकर 65 साल तक के बुजुर्ग शामिल हैं। साथ ही तीन महिलाएं भी इसमें पंजीकृत हैं। ओएसटी सेंटर के काउंसलर नीरज कुमार सेन के मुताबिक, सेंटर में केवल उन मरीजों का इलाज किया जाता है, जो इंजेक्शन के माध्यम से नशा करते हैं।
मरीजों को मिलता है पारिवारिक सपोर्ट
ऐसे लोगों की खोज का जिम्मा एक समाजसेवी संस्था को दिया गया है। काउंसलिंग और दवा का असर यह हुआ है कि की मरीज घरेलू काम में मदद करने लगे हैं। घर में झगड़ा बंद हो गया है। उनके सामाजिक स्तर में भी सुधार हुआ है। मरीजों को परिवारिक सपोर्ट भी मिलने लगा है।
ओएसटी सेंटर में पंजीकृत मरीजों का वर्षवार ब्योरा...
वर्ष पंजीकृत मरीज
2014 07
2015 81
2016 41
2017 53
2018 20
2019 09
2020 23
2021 16
2022 14
2023 01
एड्स से बचाव के लिए इंजेक्शन की बजाय दी जाती है दवा
ओएसटी सेंटर के डाटा मैनेजर धीरज वर्मा बताते हैं कि नशा करने वाले एक इंजेक्शन का कई लोग इस्तेमाल करते हैं। इससे एड्स फैलने का खतरा बना रहता है। सेंटर पर इंजेक्शन की बजाय मरीजों को खाने के लिए दवा दी जाती है। यह दवा इंजेक्शन का नशा छोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
हालांकि इस दवा का सेवन नियमित करना पड़ता है। मरीज इच्छाशक्ति के आधार पर नशे से मुक्ति भी पा सकता है। इंजेक्शन का नशा करने वाले अधिकांश मरीज एकांत स्थानों पर रहकर नशा करते हैं। वह पुराने खंडहरों, रेलवे स्टेशन आदि स्थानों पर रहते हैं, जहां आम आदमी जाने से परहेज करता है, ताकि उन्हें कोई परेशान न करे।
24 से 36 घंटे रहता है दवा का असर
ओएसटी सेंटर के स्टाफ नर्स विपिन कुमार ने बताया कि दवा को मरीज को जीभ के नीचे रखकर खिलाई जाती है। यह दवा घुलनशील होती है और जल्द असर भी करती है। इसका असर 24 से 36 घंटे तक रहता है। इससे उसे नशे की तलब नहीं लगती है और नियमित काम कर सकता है। साथ ही यहां आने वाले मरीजों की समय-समय पर एचआईवी भी की जांच की जाती है।