जिला प्रशासन इस खेल को रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई की कार्ययोजना तैयार कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक मामूली स्टांप ड्यूटी चुका कर कृषि भूमि की रजिस्ट्री कराने के बाद तथाकथित प्रापर्टी डीलर और हाउसिंग सोसायटी तैयार करने वाली अंतरजनपदीय कंपनियों ने मौजूदा समय में जिले में करीब दो सौ हेक्टअर में अपना कारोबार फैला रखा है।
नहीं मिलता है मूलभूत सुविधाओं का लाभ
कारोबार करने वाले प्लॉटिंग को कॉलोनी का स्वरूप देकर और लोगों को सभी तरह की शहरी सुविधाओं के सपने दिखाकर प्लॉटों की बिक्री कर रहे हैं। वह अपने एजेंटों के माध्यम से ग्राहक तैयार करते हैं और इसके बदले में एजेंटों को भी कमीशन और ईनाम भी देते हैं। हालांकि नगर पालिका, नगर पंचायत या प्राधिकरण क्षेत्र से बाहर होने और भूमि का उपयोग (कृषि उपयोग से आवासीय उपयोग) में परिवर्तन न होने से प्लॉट खरीदने वालों को मूलभूत सुविधाओं का लाभ भी नहीं मिलता।
भूमि का उपयोग परिवर्तन कराया गया या नहीं
डीएम गौरांग राठी ने सभी एसडीएम को ऐसी प्लॉटिंग को चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं। एसडीएम ऐसे क्षेत्रों का निरीक्षण कर वहां हो रही प्लॉटिंग और उस जमीनों के मालिकों का पता लगाएंगी। जांच होगी कि प्लॉटिंग करने के लिए उस भूमि का उपयोग परिवर्तन कराया गया या नहीं इसकी भी जांच होगी।
महानगर और राजधानी से सटा होना बना पसंद
शहर के आसपास के गांवों के अलावा हाईवे, एक्सप्रेसवे, गंगा बैराज, ट्रांस गंगा सिटी और घोषित एससीआर (राज्य राजधानी क्षेत्र) के आसपास के क्षेत्रों की ग्राम पंचायतों में कारोबारियों ने अपना जाल फैला लिया है। महानगर कानपुर और राजधानी लखनऊ के बीच का जिला होने से महानगर और राजधानी की अपेक्षा कम कीमत में प्लाट मिलने की वजह से लोग खूब खरीदारी भी कर रहे हैं।
जिले की सभी ग्राम और नगर पंचायतों का सर्वे होगा। अभिलेखों से पंचायतों की जमीनों की मौजूदा स्थिति का मिलान भी कराया जाएगा। इनमें ग्राम समाज की चरागाह, ऊसर, बंजर, खलिहान, तालाब, वन, नाला, सिंचाई नालियों, चकरोड आदि की पैमाइश करके चिन्हित किया जाएगा। साथ ही ग्राम पंचायत की मौजूदा स्थिति को दर्शाते हुए उसके फोटो सहित बुकलेट भी तैयार होगी। -गौरांग राठी, डीएम उन्नाव