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अब विदेश भेज सकेंगे दोगुनी रकम

Thu, 04 Jun 2015 02:12 AM IST
अमर उजाला कानपुर
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अवैध तरीके से विदेश भेजे जाने वाली रकम पर लगाम लगाने के मकसद से आयकर विभाग ने लिब्रलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम निकाली है। इस स्कीम का फायदा उन लोगों को मिलेगा, जो विदेश में अपने परिजनों या फिर संपत्ति आदि में निवेश करने के इच्छुक  रहते हैं। इसमें विदेश भेजे जाने वाली रकम की मौजूदा लिमिट बढ़ाकर दोगुना कर दी गई है। एक जून से नई स्कीम लागू हो गई है।
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अभी तक ऐसे भारतीय नागरिक  जो अलग-अलग कारणों से विदेश में पैसा भेजते थे, उनके लिए पैसा भेजने के लिए निर्धारित सीमा एक लाख 25 हजार अमेरिकन डॉलर थी, जिसे बढ़ाकर सीधे ढाई लाख डॉलर (लगभग डेढ़ करोड़ रुपये) कर दिया गया है। आयकर विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में यह सीमा एक वित्तीय वर्ष के लिए मान्य होगी। अधिसूचना में फॉरेन एक्सचेंज करने के लिए अधिकृत बैकों को निर्देश देते हुए नई लिमिट को मान्यता देने के निर्देश देने की बात भी कही गई है। अधिसूचना के मुताबिक यह रकम ट्रांसफर करने के लिए अधिकृत करंट या कैपिटल एकाउंट का ही इस्तेमाल किया जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति ने एक जून से पहले कुछ राशि विदेश भेजी है तो उसे मिलाकर इस वित्तीय वर्ष में वह ढाई लाख डॉलर की रकम विदेश भेज सकेगा। बैंकों को निर्देश दिए गए हैं कि विदेश पैसा भेजने के लिए वे किसी प्रकार का लोन नहीं देंगे। यह भी देखा जाएगा कि जिस एकाउंट का इस्तेमाल पैसा भेजने के लिए किया जा रहा है वह एक साल से ज्यादा पुराना हो और यदि खाता नया है तो बैंक उसकी इनक्वायरी करेंगे। बैंकों को प्रतिमाह आरबीआई के चीफ जनरल मैनेजर (फॉरेन एक्सचेंज) को यह सूचना देनी होगी कि इस स्कीम के तहत कितना पैसा किस देश में गया है।

क्या करना होगा
आपको अप्लीकेशन और घोषणा पत्र अपने अधिकृत डीलर या बैंक को देना होगा, जिसमें आपको यह दावा करना होगा कि यह फंड घोषणाकर्ता का है और किसी गलत काम के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
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क्या सुविधा
रकम परिजनों और रिश्तेदारों को भेज सकेंगे
विदेशी बैंक में फॉरेन करेंसी एकाउंट खोल सकेंगे
प्रापर्टी खरीदने या अन्य अधिकृत निवेश योजना में पैसा लगा सकते हैं
कंपनीज एक्ट में परिभाषित एनआरआई रिश्तेदार को लोन के रूप में दे सकते हैं।

इसकी है मनाही
मार्जिन ट्रेडिंग, सट्टा और लॉटरी के लिए इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।

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विदेशों में जाने वाली ब्लैक मनी को रोकने की दिशा में यह कदम मील का पत्थर साबित होगा। पुरानी लिमिट के तहत जितनी राशि अनुमन्य थी, उससे तमाम कार्य नहीं होने के चलते लोग गलत रास्तों से पैसा बाहर भेजते थे। - सीए विवेक खन्ना, आयकर सलाहकार
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