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तेजी से बढ़ रहा ऑनलाइन बैंकिंग का चलन, साइबर हमलों और हैकरों से बचाएगी ये तकनीक

Sat, 12 Jan 2019 12:40 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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देश में ऑनलाइन बैंकिंग, परीक्षाओं का चलन तेजी से बढ़ रहा है। दस्तावेज ऑनलाइन सुरक्षित किए जा रहे हैं। साइबर हमलों और हैकरों से बचने के लिए इनकी गोपनीयता और सुरक्षा बेहद जरूरी है। इसे क्रिप्टोलॉजी और नेटवर्क सिक्योरिटी के जरिए बचाया जा सकता है। हालांकि अभी इसमें बहुत काम करने की आवश्यकता है।

 

कानपुर में विशेषज्ञों ने प्रणवीर सिंह इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (पीएसआईटी), डीआरडीओ और भारतीय सांख्यिकी संस्थान (आईएसआई) के सहयोग से क्रिप्टोलॉजी एंड नेटवर्क सिक्योरिटी पर आधारित तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के पहले दिन यह जानकारी दी।

 

पीएसआईटी सभागार में हो रही कार्यशाला का शुभारंभ आईआईटी कानपुर के उपनिदेशक पद्मश्री प्रोफेसर मनींद्र अग्रवाल ने किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि  नंबर थ्योरी की उपयोगिता क्रिप्टोलॉजी में अत्यधिक है।

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बैंकों के ऑनलाइन या डिजिटल भुगतान में नंबरों की पहचान के आधार पर ही लेन-देन होता है। इसे क्रिप्टोलॉजी से और अधिक सुरक्षित किया जा सकता है। विशिष्ट अतिथि भारतीय सांख्यिकी संस्थान कोलकाता के निदेशक प्रोफेसर विमल रॉय ने सीक्रेट शेयरिंग एंड इट्स एप्लीकेशन पर कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में जो तकनीक अपनाई जा रही है, उसे और सुरक्षित करने की आवश्यकता है, ताकि साइबर फ्रॉड को रोका जा सके।
 
इजरायल के वार्लियान विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक प्रोफेसर वोस टी सावान ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए क्रिप्टोलॉजी के तकनीक के बारे में जानकारी दी। आईआईटी जम्मू के प्रोफेसर सरताज हसन ने भी विचार रखे। यहां संस्थान के चेयरमैन प्रणवीर सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। प्रबंध निदेशक शेफाली राज, निदेशक एकेडमिक डॉ. एसएल शुक्ला आदि मौजूद थे।
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