हाईकोर्ट के आदेश का पालन न करना तहसीलदार सदर को महंगा पड़ गया है। हाईकोर्ट ने अवमानना मामले में तहसीलदार को नोटिस जारी कर 16 सितंबर तक जवाब मांगा है। बिधनू के सपई गांव में सरकारी जमीन पर गैरकानूनी निर्माण पर रोक लगाने, गैरकानूनी तरीके से किए गए निर्माण के मलबे को हटाए जाने की मांग से संबंधित एक याचिका गांव सभा की ओर से गणेश शंकर बाजपेई ने हाईकोर्ट में दाखिल की थी।
इसमें हाईकोर्ट ने 18 अप्रैल 2022 को निचली अदालत में जाने और वहां बेदखली का आदेश पारित होने पर एक माह में अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। गांव सभा की ओर से शिवप्रसाद मिश्रा उर्फ लाल के खिलाफ एक वाद तहसीलदार न्यायालय में दाखिल किया गया। इसमें लेखपाल की रिपोर्ट, गांव सभा के लोगों के शपथपत्र आदि के आधार पर तत्कालीन तहसीलदार सदर ने माना कि शिवप्रसाद मिश्रा उर्फ लाल ने अक्तूबर 2021 से सरकारी जमीन में पिलर बनाकर व दीवार बनाकर अवैध कब्जा कर रखा है।
9 मई 2025 को शिवप्रसाद को जमीन से बेदखल कर 87500 रुपये क्षतिपूर्ति व 500 रुपये निष्ष्पादन शुल्क देने के आदेश दिए थे। इस दौरान तहसीलदार का तबादला हो गया और नए तहसीलदार द्वारा तहसीलदार और हाईकोर्ट के आदेश का पालन न कराने पर गणेश शंकर बाजपेई ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल कर दी। याचिका पर हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति नीरज तिवारी ने तहसीलदार सदर विनय कुमार द्विवेदी को नोटिस जारी किया है। 16 सितंबर तक जवाब मांगा है कि हाईकोर्ट के आदेश का पालन न करने पर उनके खिलाफ क्यों न अवमानना कार्रवाई की जाए।