हरदोई जिले के सवायजपुर में एसडीएम के पद पर तैनात रहे मनोज कुमार सागर को क्षेत्रीय विधायक की नाराजगी के चलते भले ही जिला छोड़ना पड़ गया हो, लेकिन जाते-जाते वह विधायक, उनकी पत्नी और छोटे भाई के लिए मुसीबत खड़ी कर गए हैं।
विज्ञापन
स्थानांतरण से पहले ही सवायजपुर तहसील के विविध भवनों का निर्माण कराने के लिए प्रस्तावित भूमि को रोक के बावजूद खरीदे जाने के मामले में विधायक समेत तीन लोगों को तत्कालीन एसडीएम ने नोटिस जारी किए हैं।
सवायजपुर से भाजपा विधायक माधवेंद्र प्रताप सिंह रानू और 16 सितंबर तक एसडीएम सवायजपुर रहे मनोज कुमार सागर के बीच कई माह से तनातनी चल रही थी। विधायक माधवेंद्र प्रताप सिंह रानू ने मनोज कुमार सागर के विरुद्ध मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गंभीर शिकायतें की थीं।
विज्ञापन
विधायक की शिकायत पर 16 सितंबर को मनोज कुमार सागर का तबादला रामपुर कर दिया गया। तहसील में तैनात रहने के दौरान ही मनोज कुमार सागर ने विधायक माधवेंद्र सिंह, उनकी पत्नी शैलजा सिंह और भाई धीरेंद्र प्रताप सिंह को गंभीर मामले में नोटिस भेज दिया।
ये नोटिस चार सितंबर को जारी किया गया था। इसमें विधायक समेत तीनों लोगों पर आरोप लगाया गया है कि किसानों की भूमि के अधिग्रहण का प्रस्ताव सवायजपुर तहसील के आवासीय और अनावासीय भवनों के निर्माण केे लिए शासन को भेजा गया था।
दो वर्ष तक कोई निर्णय इस पर नहीं हो पाया था, तो 2007 में फिर से प्रस्ताव भेजा गया। 23 जनवरी 2015 को सवायजपुर के तत्कालीन तहसीलदार और राजस्व निरीक्षक को ये निर्देश दिए गए थे कि अधिग्रहण प्रस्ताव लंबित होने के कारण संबंधित भूखंडों पर कोई निर्माण न होने दिया जाए।
उक्त भूखंडों की बिक्री पर भी पाबंदी लगाई गई थी। आरोप है कि इस सबके बावजूद विधायक माधवेंद्र प्रताप सिंह, उनके भाई धीरेंद्र प्रताप सिंह और शैलजा सिंह ने अधिग्रहण के लिए प्रस्तावित गाटा संख्याओं का बैनामा कराने के बाद उस पर पक्का निर्माण भी करा लिया जो कि नियम के विपरीत है। 15 दिन में तीनों से नोटिस का जवाब देने को भी कहा गया है।
14 सितंबर को तहसीलदार कोर्ट में वाद भी दर्ज, 24 को होनी है सुनवाई
एसडीएम सवायजपुर रहे मनोज कुमार सागर के कार्यकाल में तहसीलदार मूसाराम थारू ने भी विधायक और उनके करीबियों के विरुद्ध कार्रवाई करने में कसर नहीं छोड़ी। 14 सितंबर को ही तहसीलदार न्यायालय में तहसीलदार मूसाराम थारू ने धारा 67 के तहत एक वाद दर्ज किया है।
इसके मुताबिक ग्राम सवायजपुर के दो गाटा संख्या की पैमाइश कराने पर पता चला कि गन्ना कृषक महाविद्यालय के प्रबंधक द्वारा भूमि पर अवैध कब्जा कर पक्का निर्माण करा लिया गया। एक अन्य भूमि पर प्रबंधक द्वारा अवैध कब्जा कर तिल की फसल भी करा ली गई।
खास बात ये है कि गन्ना कृषक महाविद्यालय के प्रबंधक विधायक माधवेंद्र प्रताप सिंह के छोटे भाई भरखनी के पूर्व ब्लाक प्रमुख धीरेंद्र प्रताप सिंह हैं। इस पूरे मामले में वाद दर्ज करने के बाद सुनवाई के लिए 24 सितंबर की तारीख तय की गई है।
धीरेंद्र सिंह के अलावा सवायजपुर में प्रभु और बृज किशोर पुत्रगण नत्थू, रामनरेश त्रिपाठी पुत्र बाबूराम, उमाकांत गुप्ता पुत्र श्रीनिवास के कब्जे में भी सरकारी भूमि पाई गई। इसके अलावा मुंडेर, हरपालपुर, पलिया पूरब, बरनई चतरखा, गजियापुर, कहरई नकटौरा, ककरौआ, तौधकपुर, श्यामपुर, छोछपुर आदि में भी सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे पाए गए हैं। इन सभी के विरुद्ध भी धारा 67 के तहत वाद दर्ज किया गया है।
इसके बाद गर्माया था मामला
सवायजपुर विधायक माधवेंद्र प्रताप सिंह रानू ने एसडीएम रहे मनोज कुमार सागर की शिकायत पांच जून 2020 को मुख्यमंत्री से की थी। इसमें तत्कालीन एसडीएम मनोज सागर पर आरोप लगाया था कि उन्होंने स्वदेश नाम का एक प्राइवेट व्यक्ति अपने साथ रखा हुआ है।
वह एसडीएम के लिए अवैध वसूली करता है। वही तहसील के पटलों पर जाकर निरीक्षण करता है। लॉकडाउन के दौरान थानों से आने वाले धारा-151 के चालान की जमानत देने के मामले में भी विधायक ने आरोप लगाया था। कहा था कि जमानतदार होने के बाद भी दो से पांच हजार रुपये न देने पर एसडीएम किसी को भी जेल भेज देते हैं।
मनोज सागर से 15 दिन में मांगा गया है जवाब
सवायजपुर के एसडीएम रहे मनोज कुमार सागर के विरुद्ध दर्ज कराई गई शिकायत में आठ सितंबर को शासन के नियुक्ति अनुभाग तीन ने जवाब तलब किया है। उनसे भी 15 दिन में जवाब मांगा गया है। उन पर पद के दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही करने का आरोप है।
विधायक ने नोटिस को बताया निराधार
पूरे प्रकरण पर भाजपा विधायक माधवेंद्र प्रताप सिंह रानू ने कहा कि भेजी गई नोटिस निराधार है। अधिग्रहण के लिए भेजा गया प्रस्ताव तीन वर्ष बाद स्वत: ही खत्म मान लिया जाता है, अगर अधिग्रहण न हो तो। उन्होंने बताया कि पूर्व में तहसील में तैनात रहे कई उप जिलाधिकारी स्पष्ट तौर पर शासन को लिख चुके हैं कि तहसील भवन का निर्माण पूर्ण हो चुका है और अब अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने ये भी कहा कि मनोज कुमार सागर को नोटिस भेजने का अधिकार भी नहीं है। विधायक का कहना है कि शिकायत पर तबादला होने और शासन से जांच प्रचलित होने की बौखलाहट में मनोज सागर ने नोटिस जारी की है।