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शौक पर नोट बंदी का पहरा जारी

Wed, 23 Nov 2016 10:49 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर
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डेमो
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1000 और 500 के नोट बंद होने के 15 दिनों बाद भी शौक और मनोरंजन के काम से जुड़े लोग खाली बैठे हैं। शहरवासियों की कवायद अभी भी जरूरी चीजों को जुटाने के लिए ही जारी है। युवा ग्राहकों से गुलजार रहने वाले मोबाइल फोन, गिफ्ट आइटम, स्पोर्ट्स आइटम, रेस्टोरेंट, फूड कोर्ट में सन्नाटा है। निर्माण सामग्री के विक्रेता खाली बैठे हैं। फूलों का बाजार सुधरा है।
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बिल्डिंग मैटीरियल की बिक्री ठप
निर्माण सामग्री विक्रेता अमित यादव बताते हैं बड़े नोटों की बंदी के साथ ही काम ठप हो गया है। लोगों के पास मजदूरों को देने के लिए फुटकर पैसे नहीं हैं। इसलिए घरों में चलता हुआ निर्माण का काम बंद करा दिया है। लोगों का पूरा ध्यान घर की जरूरत की चीजों को जुटाने पर है। फिलहाल तो स्थिति सुधरने की उम्मीद नहीं दिख रही है।

बड़ी दुकानों तक सिमटी मोबाइल बिक्री
मोबाइल शॉप संचालक हसन हसीब का कहना है, मोबाइल फोन की बिक्री बड़ी दुकानों तक ही सिमट गई है। नोट बंदी के दौर में कार्ड से पेमेंट लेने वाली दुकानें पांच फीसदी तक कैशबैक का ऑफर भी दे रही हैं। दूसरी ओर छोटे मोबाइल विक्रेता, फोन से जुड़ा सामान बेचने वाले परेशान हैं। थोक बाजारों से सप्लाई बंद है। काम से जुड़े लोग खाली बैठे हैं।
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फूलों का बाजार सुधरा
बीते सप्ताह दो रुपये किलो तक बिक रहे गेंदा फूल (जाफरी) के दाम सुधरे हैं। थोक बाजार में जाफरी के दाम 15 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं। कैनाल रोड फूल मंडी के फूल विक्रेता पप्पू ने बताया कि अब बैंकों और एटीएम से पैसे मिलने लगे हैं। इसके चलते ग्राहकों की आमद बढ़ी है। शादियों के कई आर्डर भी मिले हैं। जाफरी थोक बाजार में 15 रुपये किलो तक, गुलाब 100 रुपये और गुलदाउदी 80 रुपये किलो तक बिक रही है।

500 के नोट बिना नहीं बनेगी बात
किराना, कपड़ा, बर्तन समेत अन्य फुटकर बाजारों में ग्राहकों की आमद सुधरी है। हालांकि 100 के बाद सीधे 2000 का नोट होने के कारण फुटकर की समस्या से बिक्री उम्मीद के मुताबिक तेजी नहीं पकड़ पा रही है। इसके अलावा थोक बाजार के सन्नाटे का भी असर फुटकर बाजार में है। अधिकतर दुकानों में पहले से रखा माल ही बेचा जा रहा है। करेंसी की किल्लत में व्यापारी नया माल खरीदकर पैसा नहीं फंसाना चाह रहे हैं। इसके चलते ही शहर के बाहर के व्यापारियों का आना लगभग बंद है। थोक बाजार के कारोबारी बेहाल हैं।
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