कानपुर। एडमिशन की सिफारिश न मानने पर सेंट मेरी कान्वेंट स्कूल कैंट के खिलाफ कैंट बोर्ड के चीफ एग्जिक्यूटिव आफीसर (सीईओ) अमित कुमार ने हरे पेड़ों को काटने की एफआईआर दर्ज करा दी है, जबकि पेड़ काटे ही नहीं गए। झूठी एफआईआर से परेशान स्कूल प्रबंधन ने रक्षा संपदा विभाग लखनऊ के निदेशक को पत्र लिखा है। साथ ही कहा है कि मामला रक्षा मंत्री तक ले जाएंगे।
सेंट मेरी कान्वेंट के खिलाफ गुरुवार को कैंट बोर्ड के सीईओ ने वन संरक्षण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया। ‘अमर उजाला’ ने मामले की पड़ताल की तो असलियत सामने आ गई। मौके पर जाकर देखा गया तो एक भी पेड़ कटा नहीं पाया गया। पुलिस ने हमेशा की तरह आंखें मूंदे हुए, बिना देखे-जांचे, न्याय-अन्याय को परखे बिना मुकदमा ठोक दिया। पड़ताल से पता चला कि कैंट बोर्ड के सीईओ की सिफारिश पर सत्र 2016-17 में तीन छात्राओं के एडमिशन किए गए। इसके बाद सीईओ ने एडमिशन की 14 सिफारिशें और भेजीं। कैंट बोर्ड के वाइस प्रेंसीडेंट लखन लाल ओमर ने भी एडमिशन की सिफारिश की। इस पर स्कूल प्रबंधन ने परेशानी बताई और कहा कि एडमिशन की गुंजाइश नहीं है। इससे नाराज होकर कैंट बोर्ड ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करा दी। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि पिछले एक साल से किसी पेड़ या फिर उसकी डाली की छंटाई तक नहीं कराई गई है, फिर भी सीईओ की तरफ से कैंट थाने में वन संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज करा दिया गया। यह दबाव डालने की कोशिश है। पुलिस ने भी मामले की जांच नहीं की और तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर लिया। प्रिंसिपल सिस्टर दिव्या ने एडमिशन का दबाव डालने और ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाया। जिन छात्राओं के एडमिशन की सिफारिश आई है, वह अच्छे परिवार और पैसों वालों से संबंधित हैं। अगर, सिफारिश पर एडमिशन किया गया तो एक भी जरूरतमंद और मेधावी को एडमिशन नहीं मिल सकेगा। इस मामले में पूर्व सीईओ अमित कुमार से मोबाइल फोन पर बयान लेने की कोशिश की गई लेकिन मोबाइल फोन नहीं मिला। फोन नाट रिचेबल बताता रहा।
कार्यभार छोड़ने से पहले कराई रिपोर्ट
कैंट बोर्ड के सीईओ अमित कुमार का दिल्ली ट्रांसफर हो चुका है। एफआईआर कराने के बाद उन्होंने कार्यभार छोड़ दिया। अब लखनऊ डायरेक्ट्रेट से कैंट बोर्ड के सीईओ का काम देखा जा रहा है।
एडमिशन की 250 सिफारिशें
सेंट मेरी कान्वेंट में एडमिशन की 250 सिफारिशें आई हैं। विधायक रघुनंदन भदौरिया, सलिल विश्नोई, इरफान सोलंकी के अलावा पुलिस, प्रशासनिक और सैन्य अफसरों की सिफारिशें भी हैं। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि कक्षा 1 में 180 सीटें हैं। इसके लिए 500 आवेदन फार्म आते हैं। टेस्ट के बाद अच्छी परफारमेंस वाले स्टूडेंट को एडमिशन दिया जाता है। यदि सिफारिशों का ध्यान रखा गया तो जरूरतमंद को एडमिशन नहीं मिल सकेगा। कक्षा 10 और 12वीं में एडमिशन का विकल्प नहीं होता। कक्षा 2 से 9 और 11 वीं में भी सीटें नहीं खाली रहती हैं। जब किसी स्टूडेंट का ट्रांसफर होता है, तभी एडमिशन की वैकेंसी बनती है। लेकिन वीआईपी लोग एडमिशन का दबाव डालते रहते हैं।