चित्रकूट में नागर के जंगल में डकैतों की तलाश करती पुलिस टीम।
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चित्रकूट जिले के मानिकपुर इलाके के औदर जंगल में डकैतों की तलाश के लिए एडीजी और डीआईजी ने डेरा डाल रखा है। दरोगा के शहीद होने के 36 घंटे बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। मुठभेड़ में डकैतों को गोली लगने का दावा करने वाली पुलिस के हाथ गुरुवार को पकड़े गए डकैतों के अलावा कोई और डकैत नहीं लगा है। बबुली गैंग पर शिकंजा कसने के लिए दो बटालियन अतिरिक्त पीएसी तैनात है।
पांच लाख तीस हजार के इनामी डाकू बबुली कोल से निही चिरैया गांव में गुरुवार को तड़के पुलिस की मुठभेड़ हुई थी। इसमें दरोगा जेपी सिंह शहीद हो गए और दरोगा वीरेंद्र त्रिपाठी घायल हो गए थे। मुठभेड़ में पुलिस अधिकारियों ने दावा किया है कि 60 हजार का इनामी डाकू लवलेश कोल गोली लगने से मर चुका है। उसके साथी उसे उठाकर जंगल ले गए। सरगना बबुली के पैर में गोली लगी है। कुछ अन्य डकैतों को भी गोली लगी है, जो जंगल में छिप गए हैं।
डकैतों की तलाश करने के लिए एडीजी बीएन सावंत और डीआईजी ज्ञानेश्वर तिवारी जंगल में डटे हैं। पुलिस अधीक्षक प्रताप गोपेंद्र फोर्स के साथ निही और नागर के जंगल में कांबिंग कर रहे हैं। घने जंगल में डाकुओं को तलाशा जा रहा है। साथ ही मुखबिरों को भी लगाया जा रहा है। उधर मध्य प्रदेश के सतना जिले के पुलिस अधीक्षक राजेश हिंगडकर टीम के साथ डकैतों को तलाश रहे हैं। पाठा के जंगल मेें बहिलपुरवा, मानिकपुर, मारकुंड़ी रेंज में चाराें तरफ फोर्स लगा दी है, ताकि डाकुओं को पकड़ा जा सके।