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न दरोगा मिला, न ईशा का सिर

Thu, 28 May 2015 03:00 AM IST
अमर उजाला कानपुर
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ईशा हत्याकांड के आरोपी दरोगा ज्ञानेंद्र सिंह और मनीष कठेरिया को पुलिस अब तक नहीं दबोच पाई। दोनों के गैरजमानती वारंट (एनबीडब्लू) की अर्जी पुलिस ने कोर्ट में डाल दी है। इधर, दरोगा और उसके दोस्त के कोई क्लू न छोड़ने और बार-बार लोकेशन बदल देने से सर्विलांस सिस्टम अपेक्षा के अनुसार काम नहीं कर पा रहा। इसके पीछे अफसरों की दलील है कि दोनों आरोपियों को मोबाइल और सर्विलांस सिस्टम की काफी जानकारी है। इसी के चलते आरोपी बच रहे हैं। दूसरी ओर एसएसपी शलभ माथुर ने ईशा के परिवार को गनर देने का निर्देश दिया है। हालांकि काकादेव पुलिस की एक टुकड़ी दिन-रात ईशा के मकान के बाहर तैनात है।
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दरोगा और मनीष कठेरिया की लोकेशन साथ-साथ बताई जा रही है। माना जा रहा है कि दोनों एक साथ हर घंटे-दो घंटे में अपनी लोकेशन बदल दे रहे हैं। सर्विलांस सिस्टम की जानकारी होने से ऐसी तकनीक अपना रहे हैं जिससे लोकेशन भी गलत पता चल रही है। थर्ड पार्टी सिस्टम के सहारे ज्ञानेंद्र और मनीष कठेरिया के परिचितों को अधिक फोन करने वाले नंबर निकाले गए हैं। पुलिस उस पर भी काम कर रही है। ईशा के भाई और परिवार के मोबाइल नंबर पर भी नजर रखी जा रही है। पर खास बात है कि जब भी ईशा के भाई ऐश्वर्य के पास दरोगा का फोन आ रहा तो नंबर चेंज रहता है। उधर, घटना के दसवें दिन भी ईशा का सिर बरामद नहीं किया जा सका।


यह है मामला
नवीन नगर काकादेव निवासी ईशा की शादी वर्ष 2013 में दरोगा ज्ञानेंद्र सिंह से हुई थी। इनके डेढ़ साल की बेटी सान्या है। 18 मई को दरोगा कार से ईशा को कूष्मांडा देवी मंदिर दर्शन कराने के बहाने ले गया था। 19 मई को कौशांबी के महेवा घाट थाने के पास ईशा का धड़ मिला। सिर का अभी तक पता नहीं चल सका है। इस मामले में दरोगा और साथियों पर हत्या की रिपोर्ट दर्ज है।
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