मई 2016 में ले चुका है कानून का रूप, बैंकों को मिलेगी राहत
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इन्सॉलवेंसी व बैंक्रप्सी कोड-2016 मई में कानून का रूप ले चुका है। अगले वित्तीय वर्ष अप्रैल 2017 में यह लागू हो जाएगा। कानून से लोन लेने वाले शख्स को दिवालिया घोषित करने का निर्णय जल्दी लिया जा सकेगा। दिवालिया घोषित होने के मात्र 180 दिन के अंदर कर्ज वसूल किया जा सकेगा। यह जानकारी सीए ईशा गुप्ता ने मंगलवार को कानपुर, सिविल लाइंस स्थित चार्टर्ड एकाउंटेंट संस्थान में दी।
यहां सेंट्रल इंडिया रीजनल काउंसिल की ओर से इन्सॉलवेंसी व बैंक्रप्सी कोड-2016 पर गोष्ठी का आयोजन किया गया था। ईशा गुप्ता ने बताया कि इस कानून के तहत कर्ज वसूली के लिए एक प्रोफेशनल की नियुक्ति होगी। ये लेनदारों की सहमति से संपत्ति को बिकवाएगा और कर्ज वापस की वापसी करवाएगा। ये प्रोफेशनल चार्टर्ड एकाउंटेंट भी हो सकते हैं। कर्ज वापसी में सुरक्षित लेनदारों एवं कर्मचारियों को वरीयता दी जाएगी। इसके लिए एक डाटाबेस तैयार किया जाएगा, जिसमें सभी बकाएदारों को सूची प्रकाशित होगी। रिजर्व बैंक की सूचना के अनुसार करीब 45 फीसदी लोन तनाव ग्रस्त संपत्ति के रूप में हैं। इसमें से केवल 25 फीसदी लोन वसूल हो पाते हैं। इस कर्ज को वसूलने में चार से पांच साल लग जाते हैं। यह इन्सॉलवेंसी कानून से ही संभव हो पाता है। गोष्ठी की अध्यक्षता सीए उमाशंकर गुप्ता ने की। संचालन अवधेश मिश्र ने किया।