लखनऊ के डॉ. अनुज माहेश्वरी ने कहा कि शुगर होने पर इंसुलिन लगवाने से हिचकना नहीं चाहिए। इंसुलिन से मरीज को कोई खतरा नहीं है। कई मरीज ऐसे भी हैं जिन्होंने शुरुआती दौर में इंसुलिन लगवाया और बाद में वह बिना किसी दवा व इंसुलिन के सामान्य जीवन जी रहे हैं। डॉक्टरों को भी यह बात मरीजों को समझानी चाहिए।
डॉ. अनुज माहेश्वरी मंगलवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन कॉलेज ऑफ जनरल प्रैक्टिशनर्स (आईएमए सीजीपी) के तीसरे दिन ‘इंसुलिन के लिए सही समय’ विषय पर अपने विचार रख रहे थे। उन्होंने कहा कि कुछ मरीज इंसुलिन का नाम सुनकर डॉक्टर बदल देते हैं। दूसरी जगह जाने पर डॉक्टर गोलियां देना शुरू कर देते हैं।
इससे मरीज की समस्या और बढ़ जाती है। हायक सचिव डॉ. इंद्रजीत आहूजा ने अतिथियों का परिचय कराया। आईएमए अध्यक्ष प्रो. आरती लाल चंदानी, सचिव डॉ. अर्चना भदौरिया, डॉ. एससी वाधवानी, डॉ. बी गांगुली, डॉ. एचएस चावला, डॉ. रीतेश चौधरी, डॉ. गौरव चावला, आदि मौजूद रहे।
बड़ों को भी लगवाएं टीके
बाल संक्रमण एकेडमी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और वाराणसी के डॉ. अशोक राय ने कहा कि बच्चों के टीकाकरण के साथ ही बड़ों को भी बीमारियों से बचाव के लिए इंजेक्शन लगवाना चाहिए। ज्यादातर लोग 10 साल तक के बच्चों को टीके लगवा कर भूल जाते हैं।
टीकों की क्षमता एक समय के बाद खत्म होने लगती है। कहा कि विभिन्न आयु वर्ग के लिए अलग-अलग इंजेक्शन हैं। इससे प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। 65 साल की उम्र के बाद निमोनिया व अन्य बीमारियों से बचाव के इंजेक्शन लगवा लेना चाहिए। उन्होंने टीकाकरण कार्यक्रम पर भी विचार रखे। इस दौरान डॉ. प्रदीप मट्टू, डॉ. सीएस गांधी, डॉ. नवीन सहाय मौजूद रहे।
बुखार के लिए नई जांचें
वरिष्ठ पैथोलॉजिस्ट डॉ. राहुल गौतम ने कहा कि बुखार के लिए कई तरह की नई जांचें आ गई हैं। इनसे शत प्रतिशत सही रिजल्ट मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि बुखार को गंभीरता से लेना चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह दवा नहीं देनी चाहिए। डॉ. उमेश पालीवाल और डॉ. विकास मिश्रा ने बीमारियों के बारे में बताया। इस दौरान डॉ. आरएन टंडन भी मौजूद रहे।