बगीचों व बरामदों में डंप है एक लाख क्विंटल से ज्यादा आलू
घिमऊ गांव के किसान रमोल मिश्र ने बताया कि उनका 500 क्विंटल आलू बगीचे में डंप हैं। इसी गांव के कंचन शर्मा ने बताया कि क्षेत्र के सभी शीतगृहों ने आलू भंडारण से मना कर दिया है। अरौल, शिवराजपुर, चौबेपुर शीतगृहों में आलू ले जाने पर भाड़ा इतना लगेगा कि लागत ही नहीं निकलेगी। ऐसे में वे अपने कारखाने में ही आलू डंप किए हैं। आढ़ती बलराम सिंह ने बताया कि एक अनुमान के मुताबिक क्षेत्र के गांवों में एक लाख क्विंटल से अधिक आलू भंडारण न होने के कारण इधर उधर डंप है। यदि सरकार एक सप्ताह के अंदर कोई कदम नहीं उठाती तो आलू खराब होने लगेगा।
बिल्हौर के इन गांवों में होती आलू की खेती
तहसील क्षेत्र में सर्वाधिक आलू की खेती बकोठी, अरौल, आंकिन, संती, हिंदूपुर, ददिखा, महिगवां, बिल्हौर देहात, बरौली, देवहा, देवकली, मकनपुर, इलियासपुर, दलेलपुर, खजुरी, सिहुरा, मल्लापुर, राजेपुर, कुटरा, शिवदत्तापुर, गदनापुर, कुदौरा, घिमऊ, सांभी, रतीरामपुरवा, टिकरिया, बीबीपुर, सुभानपुर, अनूपपुरवा, चौबिगही, रसूलपुर, सेंग, जुलाहा, सैबसू, बेर्रा, नानामऊ गांव में होती है।
शीतगृह संचालकों ने गेट पर लगाया धन्यवाद किसानों का पोस्टर
तहसील क्षेत्र के शीतगृह भर चुके हैं। संचालकों ने गेट पर धन्यवाद किसानों के पोस्टर लगा दिए हैं। हालांकि अभी भी 10 से 12 प्रतिशत आलू की खोदाई बाकी है। वहीं जिला उद्यान अधिकारी दिग्विजय सिंह ने बताया कि पैदावार के अनुसार बिल्हौर और उसके आसपास पर्याप्त शीतगृह हैं, किसी भी शीतगृह में भंडारण का स्थान न होने की कोई जानकारी अभी तक कार्यालय में नहीं दी गई है।