कानपुर। नगर निगम में भ्रष्टाचार उजागर होने और कार्रवाई का असर विकास कार्यों पर भी पड़ रहा है। अब ठेकेदार टेंडर डालने से पीछे हट रहे हैं। भ्रष्टाचार और टेंडर गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद पहली बार दो सितंबर को चार करोड़ से 156 विकास कार्यों के टेंडर डाले गए। इसमें 25 में एक भी फर्म आगे नहीं आई जबकि 30 में नियमानुसार तीन फार्म नहीं पड़े।
नगर निगम के हालात देखते हुए ठेकेदार अब कार्य करने से कतरा रहे हैं। इसका असर शहर के विकास कार्यों पर पड़ रहा हैं। सड़कें खुदी पड़ी हैं और जगह-जगह गड्ढे हैं लेकिन ठेकेदार एडवांस कार्य करने को तैयार नहीं हैं। रामलीला में पार्कों की सफाई के साथ सुंदरीकरण और रंगरोगन होना है। स्थिति यह है कि दो सितंबर को हुए 156 कार्यों में 101 में ही टेंडर फार्म आए हैं। इसमें भी कई में टेंडर बिलो गए है। वहीं, 101 में टेंडर फार्म पड़े हैं।
आगे के कार्य भी हो सकते प्रभावित
शहर की सड़कों का पैचवर्क कराने के लिए नौ सितंबर और इसके बाद 16 सितंबर को 15वें वित्त समेत अन्य मदों के करीब दो सौ करोड़ रुपये के कार्यों के टेंडर पड़ने है। ठेकेदारों के कार्य के प्रति रूचि न दिखाने से अधिकारियों की की चिंता बढ़ गई है।