श्रमिकों का उत्पीड़न, शोषण रोकने तथा उन्हें वाजिब पारिश्रमिक दिलाने के लिए सरकार की ढेरों योजनाएं व कानून हैं। फिर उनकी तकदीर नहीं बदल पाईं। सर्दी, गर्मी व बारिश में दिन रात कड़ी मेहनत करने वाले मजदूरों की तादाद लाखों में है। उनके लिए लागू कानून व योजनाओं की मजदूरों को ही जानकारी नहीं हैं। उधर, फरवरी माह से बंद हुई मनरेगा योजना और बालू के संकट ने हजारों मजदूरों को बेरोजगार कर दिया है। पिछले साल मंडल में 19,765 पंजीकृत मजदूर थे। लेकिन अब मनरेगा मजदूर हटने से इनकी संख्या महज 5298 बची है।
श्रम विभाग से पंजीकृत श्रमिकों को ही सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है। पंजीकरण की प्रक्रिया इतनी पेचीदा है कि ज्यादातर श्रमिक इससे मुंह मोड़ लेते हैं। श्रम विभाग में मजदूरों के पंजीयन की योजना वर्ष 2010 में शुरू हुई। इसकी बानगी यह है कि श्रम विभाग में पांच सालों में 19,765 श्रमिकों ने पंजीयन कराया। इनमें बांदा में 6480, हमीरपुर में 4400, महोबा में 3916 और चित्रकूट में 4969 श्रमिक शामिल हैं। इनमें चारों जनपदों में इस साल सिर्फ 7437 मजदूर ही रिन्यूवल करा सके। 12,328 मजदूर नवीनीकरण न होने से योजनाओं से वंचित हो गए। लेकिन दैवी आपदा ने पिछले तीन सालों से किसानों व मजदूरों को ऐसा मजबूर किया कि मजदूरों की तादाद दोगुनी हो गई। सरकारी मदद पाने के लिए इस साल बांदा में 6,138, हमीरपुर में 5,210, महोबा में 2,799 और चित्रकूट में 4,746 मजदूरों ने अपना पंजीयन कराया।
इनमें महिलाएं भी पीछे नहीं रहीं। मंडल में 5298 महिलाओं ने फावड़े व तसले थामे और विभाग में पंजीयन कराया। बांदा में 1779, हमीपुर में 948, महोबा में 961 और चित्रकूट में 1592 महिला मजदूरों का पंजीयन है। श्रमिक दो वक्त की रोटी कमाने के लिए जी तोड़ मेहनत तो करते हैं, लेकिन उनको मेहनताना के लिए चक्कर लगाने पड़ते हैं। वह चाहे सरकारी कार्यों में हो या फिर निजी भवनों में। दुकान,प्रतिष्ठान व गैराजों में काम करने वाले मजदूरों को बंदी दिन के भी सुकून नहीं मिलता। मालिक खुलेआम शोषण करते हैं। जिला श्रम अधिकारी शिवकुमार ने बताया कि मजदूर पंजीयन तो करा लेते हैं, लेकिन नवीनीकरण कराने नहीं आते। ऐसे में उनका पंजीयन रद हो जाता है। योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। उधर, मनरेगा का कार्य फरवरी माह से बंद है। इससे जुड़े मजदूर योजना से हट गए। इधर, कई माह से बालू संकट ने हजारों मजदूरों को घर बैठने या फिर पलायन को मजबूर कर दिया है।
40 श्रमिक हुए मुक्त
श्रम विभाग ने 40 बंधुवा मजदूरों को मुक्त कराकर पुनर्वास की व्यवस्था कराई है। इनमें 20 श्रमिक महोबा, 10 बांदा, 6 हमीरपुर और 3 चित्रकूट के शामिल हैं। इन मजदूरों को शासन से मिलने वाली 20 हजार रुपये की सहायता राशि अभी तक नहीं मिल सकी।
कौन हैं निर्माण श्रमिक
निर्माण श्रमिक की श्रेणी में राजगीर मिस्त्री, हेल्पर, पेंटर, बढ़ई, वायरमैन, सड़क, पुल, सुरंग, रेलवे, टावर लगाने वाले मजदूर, बिजली उन्नयन, पारेषण व वितरण में लगे श्रमिक, बांध, नहर, जलाशय बनाने वाला, पॉलिश मैन, फिटर, बेंडर, टाइल्स लगाने वाला कारीगर, लोहार, कंकरीट मिक्सर, पंप आपरेटर, क्रेन आपरेटर, बेलदार, मजदूर, कुली, चौकीदार व मुंशी शामिल हैं।
श्रमिकों के लिए लागू योजनाएं-
- दुर्घटना सहायता योजना : इसके तहत लाभार्थी श्रमिक की दुर्घटना में मौत पर एक लाख, पूर्ण स्थाई अपगंता पर 75 हजार रुपए तथा आंशिक अपगंता पर 40 हजार रुपए अनुग्रह राशि।
- मातृत्व लाभ योजना : लाभार्थी महिला कर्मकार के प्रसव के बाद एकमुश्त तीन हजार रुपए अनुदान। दो बच्चों तक यह लाभ दिया जाता है।
- शिशु पुष्टाहार योजना : लाभार्थी श्रमिक के बेटा होने पर 3000 तथा बेटी होने पर 4000 रुपए सहायता राशि।
- मेधावी छात्र पुरस्कार योजना : श्रमिक के पुत्र या पुत्री के कक्षा-5 से 8 तक 70 प्रतिशत या इसके अधिक अंक प्राप्त करने पर 4000 से 5500 रुपए, कक्षा 10 व 12, आईटीआई, स्नातक, परास्नातक में 60 फीसदी अंक पर 8000 से 13000 रुपए तक, पालीटेक्निक, इंजीनियरिंग, चिकित्सा प्रवेश परीक्षा पास करने पर 10 से 22 हजार रुपए अनुदान।
- मृत्यु व अंत्येष्टि योजना : श्रमिक की बीमारी व स्वभाविक मौत पर उसके परिवार को 30,000 सहायता राशि तथा अंत्येष्टि के लिए 8000 रुपए।
- बीमारी सहायता योजना : पंजीकृत निर्माण श्रमिक या पत्नी तथा उस पर आश्रित विवाहित पुत्री अथवा 21 वर्ष से कम आयु के पुत्र को गंभीर बीमारी का किसी शासकीय चिकित्सालय में इलाज में आए खर्च की शत-प्रतिशत प्रतिपूर्ति।
- कौशल विकास तकनीकी उन्नयन व प्रमाणन योजना : श्रमिक, पत्नी व आश्रित को आईटीआई, शासकीय अथवा मान्यता प्राप्त पालीटेक्निक से मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम के प्रशिक्षण के लिए पाठ्य पुस्तक व शिक्षण से संबंधित लेखन सामग्री दी जाती है। श्रमिक के खुद के प्रशिक्षण लेने पर उसे इस अवधि में निर्धारित मजदूरी का बोर्ड द्वारा भुगतान।
- निर्माण कामगार बालिका आर्शीवाद योजना : श्रमिक की प्रथम पुत्री या दो पुत्रियों को 20 हजार की सावधि जमा योजना का अनुदान।
- पुत्री विवाह अनुदान योजना : पांच वर्ष तक बोर्ड के पंजीकृत सदस्य के प्रथम पुत्री या दो पुत्रियों के विवाह पर 20-20 हजार रुपए अनुदान।
- निर्माण कामगार अक्षमता पेंशन योजना : दुर्घटना व बीमारी में 50 फीसदी अक्षम होने पर 500 रुपए प्रतिमाह जीवन पर्यंत पेंशन।
- औजार क्रय आर्थिक सहायता योजना : व्यवसाय से संबंधित औजार खरीदने के लिए पांच हजार तक सहायता।
- आवास सहायता योजना : आवासहीन श्रमिक की 20 वर्ग मीटर में भूमि है तो उसे पक्का आवास के लिए 45,000 रुपए दो किश्तों में अनुदान।
- सौर ऊर्जा सहायता योजना : नेडा के जरिए श्रमिक को सोलर लाइट।
- छात्रवृत्ति योजना : पंजीकृत श्रमिकों के बच्चों को कक्षा-1 से 5वीं तक 300 रुपये, 6वीं से 8वीं तक 500, 9वीं व 10वीं में 800 और 11वीं व 12 में एक हजार रुपये। उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, व्यवसायिक शिक्षा में 3000 रुपये प्रति माह।