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Kanpur News: भरण पोषण निधि में बजट नहीं, तीसरी आंख से गोशालाओं की निगरानी अटकी

Tue, 02 Dec 2025 02:40 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
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कानपुर देहात। गोशालाओं में सब ठीक है इसकी दोहरी निगरानी सीसीटीवी से करने के निर्देश हैं। इधर जिले की भरण-पोषण निधि में केवल एक लाख रुपये हैं। ऐसे में तीसरी आंख से गोशालाओं की निगरानी अटक गई है।
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गोशालाओं में अव्यवस्था की तस्वीरें सामने आती रहती हैं। कहीं कमजोर होकर मवेशी मर रहे हैं तो कहीं साफ-सफाई का इंतजाम नहीं है। गोशालाओं में व्यवस्थाओं की निगरानी की जा सके इसके लिए तीसरी आंख (सीसीटीवी) से दोहरी निगरानी की जानी है। पशुधन अनुभाग-दो के मुख्य सचिव एसपी गोयल ने 11 नवंबर को गोशालाओं की जिला व निदेशालय के कंट्रोल रूम से निगरानी के आदेश दिए हैं।
गोसंरक्षण एवं संवर्धन कोष (भरण पोषण निधि), सीएसआर, उद्योग व्यापार मंडल के आर्थिक सहयोग, वायाबिलिटी गैप फंड या फिर विधायक व सांसद निधि से गोशालाओं में सीसीटीवी लगाने का विकल्प है। जिले की भरण-पोषण निधि खाते में केवल एक लाख रुपये ही हैं। जबकि 10 लाख रुपये से अधिक वाली धनराशि ही खर्च के लिए निकाली जा सकती है। अन्य मद से ही फिलहाल आर्थिक सहयोग का इंतजाम नहीं है। ऐसे में पशुपालन विभाग के अधिकारी विधायक निधि या फिर अन्य उपलब्ध संसाधनों से कैमरे लगवाने के विकल्प तलाश रहे हैं।
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जिले में ग्रामीण क्षेत्र की 79 गोशालाएं और नगरीय क्षेत्र की 14 गोशालाओं में संरक्षित कुल 10350 गोवंशीय मवेशी की सीसीटीवी से निगरानी अटकी है। जानकारों का कहना है कि केयर टेकर मवेशियों को हरा चारा व दाना दे रहे हैं और साफ-सफाई की व्यवस्था दुरुस्त है इसकी तीसरी आंख से निगरानी होना जरूरी है। हालांकि जिले में यह व्यवस्था लागू होने में समय लगेगा। मुख्य पशुचिकित्सक डॉ. सुबोध बर्नवाल ने बताया कि भरण पोषण निधि में पर्याप्त बजट नहीं है। सीडीओ से वार्ता की गई है। फिलहाल अन्य स्रोत से आर्थिक सहयोग लेकर गोशालाओं में सीसीटीवी कैमरे लगाने में तीन माह लगने का अनुमान है।
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