कानपुर के हैलट में डेंगू एंटीजन की जांच न होने से डॉक्टरों को रोग की पुष्टि करने में सात दिन लग जा रहे हैं। इस दौरान लक्षणों के आधार पर ही इलाज होता है। डेंगू के अलावा दूसरे वायरल संक्रमण में भी खून में प्लेटलेट्स काउंट कम होने लगते हैं।
जब तक डेंगू की पुष्टि नहीं होती तब तक डॉक्टर प्लेटलेट्स नहीं चढ़वा रहे। जांच में देरी से मरीज की जान को खतरा भी हो सकता है। सरकारी अस्पतालों में सिर्फ हैलट में ही डेंगू एंटी बॉडीज की जांच की सुविधा है।
डेंगू की पुष्टि के लिए दो जांच की जाती हैं। एक जांच एंटीजन की होती है और दूसरी एंटी बॉडीज बनने की। डॉक्टरों का कहना है कि डेंगू संक्रमण के बाद शरीर में एंटी बॉडीज बनने में सात दिन लग जाते हैं। इसी बीच ब्लड सैंपल की रिपोर्ट निगेटिव आती है।
समय पर सटीक इलाज के लिए एंटीजन की जांच होनी चाहिए। हैलट में इस वक्त एंटीजन की जांच बंद है। मेडिकल कॉलेज के सीनियर फिजीशियन एवं आईसीयू प्रभारी डॉ. प्रेम सिंह का कहना है कि एंटीजन जांच न होने से बहुत से डेंगू पॉजिटिव रोगी निगेटिव आ जाते हैं। उर्सला के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मुन्ना लाल ने बताया कि किट आ गई है। कुछ व्यवस्था न हो पाने से जांच नहीं हो पा रही है।