आईआईटी कानपुर की पीके केलकर लाइब्रेरी से 18 हजार किताबों के गायब होने का मामला सामने आया है। इनकी कीमत करीब 90 लाख रुपये बताई जा रही है। मामले की जांच के बाद इंस्टीट्यूट एडवाइजरी कमेटी (आईएसी) ने लाइब्रेरियन को सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
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डिप्टी डायरेक्टर प्रो. मणिंद्र अग्रवाल ने बताया कि लाइब्रेरियन को मामले की जांच का निर्देश दिया गया है। इसमें देखा जाएगा कि गायब किताबों को किसे आवंटित किया गया है। अगर उसका कोई रिकॉर्ड होगा तो किताब ले जाने वाले छात्र या शिक्षक को नोटिस जारी किया जाएगा। वहीं अगर किताबों का रिकॉर्ड नहीं मिलेगा तो संबंधित जिम्मेदार के खिलाफ कार्रवाई होगी।
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यह है आरएफआईडी टैगिंग
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कमेटी ने लाइब्रेरियन को निर्देश दिया है कि लाइब्रेरी के प्रत्येक किताबों में रेडियो फ्रीक्वेंसी आईडेंटीफिकेशन डिवाइस (आरआईएफडी) की टैगिंग की जाए। इससे बगैर कंप्यूटर में नाम और नंबर दर्ज कराए अगर कोई छात्र या अन्य चोरी से किताब लाइब्रेरी से बाहर ले जाएगा तो गेट पर सायरन बजने लगेगा। बताते चलें कि किताबों को लेते और वापस लेते समय लाइब्रेरी में इंट्री की जाती है।
बढ़ाए जाएंगे कर्मचारी, महिला कर्मचारी भी होंगी
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इंस्टीट्यूट की लाइब्रेरी से किताबें दोबारा गायब न हों, इसके लिए कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जाएगी। इसके अलावा लाइब्रेरी खुलने तक महिला कर्मचारियों की उपस्थिति भी सुनिश्चित की जाएगी ताकि छात्राओं पर महिला कर्मचारी निगरानी रख सकें।
- छात्रों को न तो समूह में प्रवेश दिया जाएगा और न ही उन्हें लाइब्रेरी से बाहर जाने की अनुमति दी जाएगी। मतलब एक-एक करके ही छात्र बाहर जा सकेंगे या अंदर प्रवेश करेंगे।
- किताबों को वापस देने की अधिकतम समय-सीमा को बढ़ाया जाएगा ताकि किताब ले जाने वाले छात्र या शिक्षक उसका भरपूर प्रयोग कर पाएं।
- लाइब्रेरी परिसर में सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाई जाएगी।