कानपुर देहात। जिले में ब्लैक फंगस का पहला केस मिलने के बाद अब जिला अस्पताल में संदिग्ध पहुंचने लगे हैं। गुरुवार को ओपीडी में नौ संदिग्ध मरीज पहुंचे। जिनका नेत्र रोग विशेषज्ञ ने परीक्षण किया। फिलहाल किसी में ब्लैक फंगस की पुष्टि नहीं हुई।
कोरोना संक्रमण के बाद अब ब्लैक फंगस ने लोगों को चपेट में लेना शुरू किया है। जिसको लेकर एहतियात बरती जा रही है। बुधवार को जिले में पहले ब्लैक फंगस रोगी के मिलने की पुष्टि हुई। पुखरायां कस्बा के आजाद नगर निवासी राजू लखपति ने चेहरे में आंख के नीचे का हिस्सा काला पड़ने पर कानपुर के निजी अस्पताल में जांच कराई थी। रिपोर्ट में ब्लैक फंगस पाया गया।
बीमारी से बचाव के लिए जिला चिकित्सालय अकबरपुर में सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक ओपीडी शुरू की गई है। गुरुवार को नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. आरए मिर्जा ने ओपीडी में आए नौ संदिग्धों का परीक्षण किया। जांच के दौरान किसी में ब्लैक फंगस की पुष्टि नहीं हुई। नेत्र विशेषज्ञ ने बताया कि ब्लैक फंगस बीमारी के प्रारंभिक लक्षण आंखों में खुजली होना, लालपन, आंख का बाहर की तरफ निकलना, ज्यादा आंसू आना, ऊपर की पलक का गिर जाना है।
इसके अलावा बार-बार छींक, नाक में खुजली होने के साथ पानी भी निकलता है। प्रारंभिक लक्षण के दौरान लापरवाही होने पर सांस लेने में दिक्कत के साथ नाक जकड़ जाती है। उन्होंने बताया कि किसी भी लक्षण पर बिना डॉक्टर की सलाह लिए कोई भी दवा इस्तेमाल न करें। इससे दिक्कत और बढ़ सकती है।
एल-टू अस्पताल में ब्लैक फंगस पीड़ितों के लिए दो बेड आरक्षित
कानपुर देहात। ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों को देखते हुए कोविड एल-टू अस्पताल में मरीजों के लिए दो बेड आरक्षित किए गए हैं, लेकिन सर्जरी जैसे हालात होने पर इलाज की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में उन्हें कानपुर के हैलट में रेफर किया जाएगा। सीएमएस डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि एहतियात के तौर पर एल-टू अस्पताल मेें दो बेड आरक्षित कर दिए गए हैं। गंभीर मरीजों के लिए सर्जरी की व्यवस्था नहीं है।