बिधनू की ‘नौ देवियां’ स्कूल रहित अपने गांव में बच्चों को शिक्षा का वरदान दे रही हैं। गांव में स्कूल नहीं है, पढ़ाने के लिए जगह नहीं है, बिजली भी नहीं है। इन तमाम दुश्वारियों को पीछे छोड़ते हुए इन युवतियों ने धान कुटाई के कारखाने में पनाह ली और वहीं रोज दो घंटे बच्चों को पढ़ाती हैं।
इस दौरान कारखाने में काम-काज बंद रहता है। इस स्कूल में बच्चों की संख्या बढ़कर 70 पहुंच गई है। युवतियां बिधनू और शहर से ग्रेजुएशन कर रही हैं।
नगर के बिधनू ब्लॉक में स्थित कल्यानी पुरवा सेन पश्चिम पारा में करीब 70 परिवार रहते हैं। खेती और मजदूरी यहां के
ग्रामीणों का मुख्य काम है। स्कूल दो किलोमीटर दूर दूसरे गांव में है इसलिए तमाम बच्चे शिक्षा का सूरज तक नहीं देख सके। इसलिए गांव की नौ देवियों लक्ष्मी देवी, कंचन देवी, सुष्मिता कुशवाहा, रीना गौतम, सोनी गौतम, पूजा गौतम, मोनी कुशवाहा, अनामिका कुशवाहा और अर्चना गौतम ने गांव में स्कूल चलाने का बीड़ा उठाया। दिक्कतें बेशुमार थीं। स्कूल खोलने के लिए जगह कौन दे।
गांव वाले एक कमरा तक देने में मुकर गए। आखिर में जिद करने पर सुष्मिता के पिता उमेश कुशवाहा ने धान कुटाई के अपने कारखाने में दो घंटे के लिए स्कूल चलाने की अनुमति दे दी। युवतियों ने दिन-रात कड़ी मेहनत करके गांव के एक-एक परिवार से मुलाकात की। बच्चों को पढ़ने भेजने पर जोर दिया। धीरे-धीरे गांव के लोगों ने बच्चों को स्कूल भेजना शुरू कर दिया। बच्चों की संख्या बढ़ने पर पैसे का संकट खड़ा हो गया। तब इन युवतियों ने अपने जेब खर्च और चंदे से चॉक, कॉपी-किताबें और पेंसिल का इंतजाम किया और जीत ली जंग। गांव के लोग इन नौ देवियों को मुंह भर-भर के दुआएं दे रहे हैं।