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Kanpur News: रात का पारा चढ़ा, आज से बदल सकता माैसम

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कानपुर। हल्के बादलों के आने और नमी बढ़ने से दिन का पारा 3.1 डिग्री नीचे आ गया और रात का पारा चढ़ गया। 27 अप्रैल की रात 17 साल में सबसे अधिक गर्म रही। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि 28 अप्रैल से माैसम बदल सकता है। 29-30 अप्रैल को नमी और बादल बढ़ने का अनुमान है। इसके साथ ही तेज हवाएं चलेंगी और बूंदाबांदी भी हो सकती है। माहौल में नमी बढ़ने से उमस बढ़ेगी।
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सोमवार को अधिकतम तापमान 44.1 डिग्री से घटकर 41 पर आ गया लेकिन रात का तापमान 0.8 डिग्री बढ़कर 25.8 डिग्री पर पहुंच गया। सीएसए के मौसम विभाग के नोडल और तकनीकी अधिकारी अजय मिश्रा ने बताया कि 17 साल में 27 अप्रैल का यह सबसे अधिक न्यूनतम तापमान है। इसके पहले वर्ष 2009 में 27 अप्रैल को न्यूनतम तापमान 27.5 डिग्री रहा था। अभी तक अप्रैल के पूरे महीने का सबसे अधिक न्यूनतम तापमान 28.4 डिग्री वर्ष 2024 में 26 अप्रैल को रिकॉर्ड किया गया था।

सीएसए की मौसम वेधशाला की रिपोर्ट के मुताबिक 24 घंटे में सुबह की नमी 25 प्रतिशत और दोपहर की नमी सात प्रतिशत बढ़ी है। सोमवार को सुबह की नमी 67 प्रतिशत और दोपहर की नमी 26 प्रतिशत रिकॉर्ड की गई। अधिकतम तापमान सामान्य से 1.2 डिग्री और न्यूनतम तापमान 3.2 डिग्री अधिक रहा। मंगलवार रात से बादलों की आवाजाही बढ़ सकती है।
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वरिष्ठ मौसम विज्ञानी डॉ. एसएन सुनील पांडेय ने बताया कि मौसमी गतिविधियों में बदलाव हो रहा है। पुराना चक्रवाती हवाओं का घेरा निकल रहा है। नया सिस्टम आने वाला है। राजस्थान और दूसरे प्रांतों पर इसका असर दिख रहा है। इस सिस्टम के कानपुर पहुंचते ही मौसम बदलेगा। गुरुवार को नमी के सात बादल बढ़ेंगे और बौछारें पड़ने का अनुमान है।

लू को हल्के में न लें, पानी सबसे सटीक दवा
कानपुर। भीषण गर्मी के मद्देनजर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि लू को हल्के में न लें। यह खतरनाक हो सकती है। इसमें शरीर का तापमान बढ़ जाता है और शरीर की ताप नियंत्रित करने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। समय पर उपचार न मिलने पर यह जानलेवा साबित हो सकती है। एसोसिएशन के कांफ्रेंस हॉल में अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा, सचिव डॉ. शालिनी मोहन, डॉ. डीपी अग्रवाल, डॉ. एसी अग्रवाल, डॉ. विशाल सिंह आदि विशेषज्ञों ने पत्रकारों को बताया कि शरीर में पानी और नमक की कमी होने से गुर्दों की खराब होने के साथ पूरे शरीर के मेटाबोलिज्म पर असर आता है। पानी सबसे सटीक दवा है। इसका सेवन करते रहें। बुजुर्ग एवं छोटे बच्चे, बाहर काम करने वाले लोग, हृदय, गुर्दा या अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रस्त मरीज, डिहाइड्रेशन से पीड़ित व्यक्तियों को ज्यादा खतरा है। (ब्यूरो)
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लू के लक्षण:
- तेज बुखार एवं शरीर का अत्यधिक गर्म होना।
- सिरदर्द, चक्कर आना, कमजोरी, उल्टी या मतली।
- पसीना कम आना या बंद हो जाना, त्वचा लाल, सूखी और गर्म होना।
- भ्रम, बेहोशी या दौरे (गंभीर स्थिति में) की स्थिति।

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बचाव
- दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी, ORS, नींबू पानी, छाछ आदि का सेवन करें।
- धूप में निकलते समय सिर को टोपी, गमछा, छाता से ढंके।
- हल्के, ढीले एवं सूती कपड़े पहनें।
- दोपहर 12 से 4 बजे के बीच अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें।
- खाली पेट बाहर धूप में न जाएं।
- लू के रोगी को तुरंत ठंडी जगह पर ले जाएं।
- कपड़े ढीले करें और शरीर को गीले कपड़े से पोंछकर ठंडा करें।
- रोगी होश में हो तो तुरंत ओआरएस दें, अस्पताल ले जाएं।
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